“मुक्तक”मुक्तक तेरे चार गुण कहन-शमन मन भाव।

25 मई 2018   |  महातम मिश्रा   (77 बार पढ़ा जा चुका है)

“मुक्तक”


मुक्तक तेरे चार गुण कहन-शमन मन भाव।

चाहत माफक मापनी मानव मान सुभाव।

चित प्रकृति शोभा अयन वदन केश शृंगार-

समतुक हर पद साथ में तीजा कदम दुराव॥-१


यति गति पद निर्वाह कर छंद-अछन्द विधान।

अतिशय मारक घाव भरि मलहम मलत निदान।

वर्तन-नर्तन चिन्ह लय कंठ सुकोमल राग-

करुण-दरुण दुख-सुख कहे मुक्तक मोह सुजान॥-२


महातम मिश्र गौतम गोरखपुरी

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