हाय हैंडसम !

31 मार्च 2015   |  शब्दनगरी संगठन   (256 बार पढ़ा जा चुका है)

हाय हैंडसम !

नारी सौंदर्य की बातें तो अक्सर होती हैं लेकिन पुरुष भी सौंदर्य के पृष्ठ पर पीछे क्यों रहें. वास्तव में कौन है जो सुन्दर नहीं दिखना चाहता ! अगर आप ये सोच रहे हैं कि हम आपको नीबू, शहद, संतरे के छिलके या गुलाबजल वगैरह के प्रयोग बताने जा रहे हैं, तो इस लेख में आपके मन का शायद कुछ न मिले. आपने ये तो सुना ही होगा कि सुन्दर वो, जो सुन्दर काम करे. हम आपके साथ ऐसी ही कुछ बातें साझा करने जा रहे हैं.


पहले तो आपसे एक सार्वभौमिक सत्य साझा कर लें कि मनुष्य को ईश्वर की सुन्दरतम रचना कहा गया है. हम तो व्यर्थ ही मन को छोटी-छोटी बातों में उलझा लेते हैं, जैसे-'क्या करूँ, मेरी हाइट अच्छी नहीं है...मेरा कॉम्प्लेक्शन डार्क है...या मेरा वज़न ज़्यादा है. कुछ और नहीं तो अपनी ही आँखें, नाक, कान, होंठ, रंग और रूप पर आकर अटक जाते हैं. हो सकता है किसी ब्यूटी-कांटेस्ट में इन छोटी-छोटी खामियों की वजह से हम कोई ख़िताब न जीत पाएं, लेकिन ज़िंदगी की प्रतियोगिता में इन चीज़ों के बहुत मायने नहीं होते.


दुनिया में कितने ही लोग ऐसी तमाम खामियों के साथ जीवन के रंगमंच पर अहम भूमिकाएं निभा रहे हैं. ज़रा पूछिए उनके बच्चों से कि आपके पापा कैसे हैं. यक़ीनन आपको जवाब यही मिलेगा कि 'मेरे पापा बहुत अच्छे हैं.' ऐसा नहीं है कि बच्चे 'हैंडसम' और 'होमली' का फर्क नहीं समझते या वो हमें 'फ़्लर्ट' करते हैं. वास्तव में एक तस्वीर वो है जिसे हम अचानक देखकर अच्छे-बुरे का विश्लेषण करके अपने मष्तिष्क में बसाते हैं, और दूसरी वो जो हमारे कार्यों के माध्यम से दृष्टा के मन में उभरती है और मष्तिष्क-पटल पर दर्ज हो जाती है. अचानक बनने वाली तस्वीरें, अचानक धुंधला भी जाती हैं, लेकिन हमारे कार्यों के माध्यम से बनी तस्वीरें अमिट होती हैं.


पुरुष के सुन्दर दिखाई देने के थोड़े अलग आधार हैं. कृत्रिमता पुरुषों पर ज़्यादा नहीं फबती. पुरुष प्राकृतिक रूप में अधिक सुन्दर दिखाई देते हैं. चेहरा आपकी सोच, आपकी विचार शैली का आइना होता है, इसलिए आपके भीतर चल रहे सुन्दर विचार आपको निश्चित रूप से सुंदरता प्रदान करते हैं. आपकी बातचीत, आपका व्यवहार, आपका उठना-बैठना, चलना-फिरना, दृष्टा के मन में आपके बारे में तमाम चित्र अंकित कर देता है. उम्र, आदमी को उतना उम्रदराज़ नहीं करती, जितना उसकी सोच उसे प्रभावित करती है.


अच्छी शिक्षा, संस्कार, अच्छा स्वास्थ्य, आपकी विश्वासपात्रता, कुछ ऐसे तत्त्व हैं जो आपको ऐसी सुंदरता प्रदान करते हैं जिसे किसी साधन और सौंदर्य-प्रसाधन के माध्यम से अर्जित नहीं किया जा सकता. पुरुष हैं तो पुरुषोचित गुणों को भी धारण करें, देखें, कोई आपको 'हैंडसम' कहके कैसे नहीं पुकारता !


-ओम

अगला लेख: आज का शब्द (२)



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
02 अप्रैल 2015
महीना अप्रैल का...अजी इसमें ख़ास क्या है, हर साल आता है, मार्च के बाद और मई से पहले. लेकिन, सच कहें तो पूरे वर्ष अप्रैल में कुछ ऐसा होता है जो बाक़ी के महीनों में नहीं होता. इस महीने की शुरूआत को ही देखिये, कैसा बुद्धू बनाकर आता है. पहली अप्रैल यानि हंसी-मज़ाक का दिन 'एप्रिल फ़ूल'. अपने-अपने ढंग से अपन
02 अप्रैल 2015
11 अप्रैल 2015
यार मदारी! तुम अच्छे हो; रस्सी पर चल लेते हो, लोहे के छल्ले से कैसे ये करतब कर लेते हो? एक पैसे से दो फिर दो से, चार उन्हें कर देते हो; हाँ तो जमूरे कह-कह के, क्या से क्या कर देते हो I कालू-भालू और बंदरिया सबको नचाते एक उंगली पर, एक डुगडुगी की थापों पर सबका मन हर लेते हो I जीवन की पगडंडी पर, मु
11 अप्रैल 2015
11 अप्रैल 2015
पाचक : १- रसोइया, बावर्ची, खानसामा; प्रयोग : हमारा पाचक अत्यंत स्वादिष्ट भोजन बनाता है I २-वह पदार्थ जो खाई हुई चीज़ को पचाता हो या पाचन शक्ति बढ़ाता हो; प्रयोग : प्राकृतिक वस्तुओं से बना अवलेह सर्वोत्तम पाचक होता है I ►'अवलेह' का अर्थ होता है, किसी वस्तु का गाढ़ा लसीला रूप जैसे गाढ़ी औषधि आदि I
11 अप्रैल 2015
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x