बातें कुछ अनकही सी...........: सवाल कुछ यूँ भी हैं जिंदगानी में

29 मई 2018   |  युगेश कुमार   (149 बार पढ़ा जा चुका है)

बातें कुछ अनकही सी...........: सवाल कुछ यूँ भी हैं जिंदगानी में

सवाल कुछ यूँ भी हैं जिंदगानी में

कि अश्क हैं भी और गिरते भी नहीं।

शरीर टूटता है उन कामगार बच्चों का

एक आत्मा थी जो टूटी है पर टूटती भी नहीं।

उस बच्ची का पुराना खिलौना

आज मैंने कचरा चुनने वाली बच्ची के पास देखा

पता है खिलौना टूटा है,पर इतना टूटा भी नहीं।

ठगे जाते हैं लोग अक्सर सत्ता-धारियों से

बौखलाहट है,पर शायद उतनी भी नहीं।

बड़ा आसान देखा है मैंने आरोप लगाना

कमिया कुछ मुझमें भी होंगी,गलती बस उसी की नहीं।

पिता को मैंने हमेशा थोड़ा कठोर सा देखा है

कभी जो अंदर झाँक के देखा,शायद इतने भी नहीं।

गुबार है गर दिल में तो निकल जाने दो

दर्द जो होगा तो एक बार होगा,पर उतना भी नहीं।

किसी की कामयाबी देखकर घबरा न जाना

जुनून को सुकून चाहिए,पर उतना भी नहीं।

भला जरूर करना लोगों का,बस खुश करने की कोशिश नहीं

दोस्त जरूर चाहिए सबको,पर उतने भी नहीं।

फकत दिल का रोना भी कोई रोना है यारों

गम और भी हैं ज़िंदगानी में,कम्बख्त बस यही तो नहीं।

©युगेश

बातें कुछ अनकही सी...........: सवाल कुछ यूँ भी हैं जिंदगानी में

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