महीना अप्रैल का...

02 अप्रैल 2015   |  शब्दनगरी संगठन   (331 बार पढ़ा जा चुका है)

महीना अप्रैल का...

महीना अप्रैल का...अजी इसमें ख़ास क्या है, हर साल आता है, मार्च के बाद और मई से पहले. लेकिन, सच कहें तो पूरे वर्ष अप्रैल में कुछ ऐसा होता है जो बाक़ी के महीनों में नहीं होता. इस महीने की शुरूआत को ही देखिये, कैसा बुद्धू बनाकर आता है. पहली अप्रैल यानि हंसी-मज़ाक का दिन 'एप्रिल फ़ूल'. अपने-अपने ढंग से अपनों को बेवक़ूफ़ बनाने का दिन या ख़ुद 'मामू' बन जाने का दिन. क्या ये अजीब बात नहीं कि सयानी हो रही दुनिया में अप्रैल का महीना ही हमें ये मौका देता है कि एक दिन हम किसी को हंसने-हंसाने के लिए ही सही, मूर्ख बना सकें या चाल उल्टी पड़ जाये तो ख़ुद मूर्ख बन जाएँ. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसकी शुरूआत कब और कैसे हुई ?


मान्यता ये है कि 'एप्रिल फूल डे' की शुरूआत फ़्रांस में तब हुई जब पोप चार्ल्स IX ने पहले से चल रहे कैलेंडर को रोमन कैलेंडर में बदल दिया. सन १५८२ से पहले फ़्रांस में नया साल १ अप्रैल को शुरू किया जाता था लेकिन वहां भी रोमन कैलेंडर लागू होने के बाद नया साल १ जनवरी को मनाया जाने लगा. लोगों को इसकी जानकारी नहीं थी इसलिए उन्हें मूर्ख समझा गया और तभी से शुरू हुआ 'एप्रिल फ़ूल डे' लोग ये भी मानते हैं कि इसकी शुरूआत हिलैरिया नामक रोमन फेस्टिवल से हुई. आपको मालूम होगा कि यह यूरोप, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, ब्राज़ीक और अमेरिका में भी मनाया जाता है.


अप्रैल का महीना, वसंत के उत्कर्ष का खूबसूरत महीना है. हर तरफ रंग-बिरंगे फूलों के सजने का महीना है. ये वो ख़ास महीना है जब देश-विदेश में प्रकृति अपने नए स्वरुप को लेकर आती है. वसंत की शुरुआत के साथ-साथ काश्मीर की वादियां रंग बिरंगे फूलों से सज जाती हैं, और क्यों न हों, अप्रैल के महीने में श्री नगर डल झील के किनारे स्थित एशिया के सबसे बड़े ट्यूलिप गार्डन में ट्यूलिप की कलियाँ अंगड़ाई जो लेने लगती हैं. काश्मीर में अप्रैल का महीना, ट्यूलिप फेस्टिवल के नाम होता है जिसे देखने के लिए दूर-दूर से सैलानी खिंचे चले आते हैं. कहते हैं यहाँ ट्यूलिप की ६० से ज़्यादा क़िस्में हैं. तो, आप कब जा रहे हैं काश्मीर...!


अप्रैल का महीना यानि बैसाखी, रंगाली बिहू, विशू और मोन्यू उत्सव का महीना. पंजाब की मस्ती और वहां के हर्षोल्लास से भला कौन परिचित नहीं है. गेंहूँ के खेत, मक्के की रोटी, चने का साग, छाछ का बड़ा गिलास, ढोल नगाड़ों पर भांगड़ा करते चौड़ी छाती लिए मदमस्त बांके नौजवान और रंग-बिरंगी ओढ़नी लहराती पंजाबी कुड़ियाँ. यही तो है पंजाब...मेहनतकश किसानों का पंजाब, जब मिलजुल कर कोई पर्व मनाया जाता है तब वो त्यौहार ख़ुद-ब-ख़ुद बैसाखी हो जाता है. वास्तव में यहाँ के किसान फसल पकने पर अपनी ख़ुशी का इज़हार, नाच-गाकर करते हैं. परंपरा के अनुसार, भांगड़ा और गिद्दा किया जाता है. इसके अलावा, लोकसंगीत, लोकगीत, और लोकनाट्य भी इस त्यौहार का प्रमुख हिस्सा होते हैं. इसी दिन को यहाँ 'संवत्सर' भी कहा जाता है. पश्चिम बंगाल में इसे 'नबा' और केरल में 'विशू' भी कहते हैं.


थोड़ा और आगे बढ़ें तो असम में १४ से १६ अप्रैल तक 'रंगाली बिहू' मनाते हैं. वहां इसे वसंत का आगमन माना जाता है.साथ ही साथ ये कृषि से जुड़ा हुआ त्यौहार भी है. सब मिलजुल कर अच्छी फसल और अपने मवेशियों के लिए प्रार्थना करते हैं और फिर शुरू होता है यहाँ का पारम्परिक 'बिहू नृत्य'. ढोल-नगाड़ों की तेज़ थापों पर थिरकते प्रेम-गीत वादियों में गूंजने लगते हैं. ऐसा लगता है मानो पूरी कायनात अपने पैरों में घुँघरू बांधकर थिरक रही हो. 'बिहू' के दिन, पिसे हुए चावल से यहाँ का खास पकवान 'पीठा' बनाया जाता है. भारतीय लोक संस्कृति का अनूठा रूप, यहाँ से बेहतर शायद ही कहीं और मिले.


वसंत के आगमन पर, अप्रैल के पहले सप्ताह में नागालैंड की कोन्यक जनजाति आओ लियांग मोन्यू उत्सव मानती है. यह त्यौहार भी फूलों के खिलने और अच्छी फसल के साथ सम्पन्नता के लिए मनाया जाता है. इस त्यौहार में घर का मुखिया खेतों पर जाकर ईश्वर से प्रार्थना करता है. यह क्रम ६ दिनों तक चलता है. इस त्यौहार में एक और खास बात है कि त्यौहार के अंतिम दिन घरों की और पूरे गांव की स्वच्छता का कार्यक्रम चलता है. है न ये एक अच्छी सी बात...!


सच है...अप्रैल का महीना केवल दीवार पर टंगा कैलेंडर के बारह महीनों का हिस्सा भर नहीं है. यह खास है क्योंकि मूर्ख दिवस से शुरू हुए इस महीने का अंत बड़ी समझदारी भरा होता है. भारत की जनजातियां भी साफ़-सफाई का इल्म रखती हैं और अनेक व्यवहारिक जानकारियां भी जीवन का अहम हिस्सा बनती हैं.


इस तरह अप्रैल का ये महीना उमंगों, तरंगों, खुशियों, परम्पराओं, कृषि-कार्यों और ज्ञान-विज्ञानं सहित अनेकानेक क्षेत्रों में विपुल प्रगति एवं सम्पन्नता का दूसरा नाम भी है. तो आइये, स्वागत करें अनूठे अप्रैल का !

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धन्यवाद , विजय जी ....

अप्रैल माह से संबंधित अच्छी जानकारी दी गई है- धन्यवाद शब्दनगरी

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