एक भाषा

03 अप्रैल 2015   |  शब्दनगरी संगठन   (232 बार पढ़ा जा चुका है)

एक भाषा

जनता में एक भाषा के माध्यम से ही एकता आ सकती है. दो भाषाएँ जनता को निश्चय ही विभाजित कर देंगी, यह एक अटल नियम है. भाषा के माध्यम से संस्कृति सुरक्षित रहती है. चूंकि भारतीय एक होकर सामान्य सांस्कृतिक विकास करने के आकांक्षी हैं, अतः सभी भारतीयों का यह अनिवार्य कर्त्तव्य है कि वह हिन्दी को अपनी भाषा के रूप में अपनाएं.

-डॉ० भीमराव अम्बेडकर

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