पुष्प की अभिलाषा

04 अप्रैल 2015   |  शब्दनगरी संगठन   (559 बार पढ़ा जा चुका है)

पुष्प की अभिलाषा

साहित्यकार माखनलाल चतुर्वेदी, हिंदी साहित्य के श्रेष्ठतम रचनाकारों में से एक हैं. आपका जन्म ४ अप्रैल १८८९ को मध्य प्रदेश के होशंगाबाद ज़िले में बाबई नामक स्थान पर हुआ था. आप भारत के ख्यातिप्राप्त कवि, लेखक और पत्रकार थे जिनकी रचनाएँ अत्यंत लोकप्रिय हुईं। सरल भाषा और ओजपूर्ण भावनाओं के वे अनूठे हिंदी रचनाकार थे। वे एक ख्यातिप्राप्त कवि, लेखक और पत्रकार ही नहीं बल्कि एक सच्चे देशप्रमी भी थे. आपकी कविताओं में देशप्रेम के साथ साथ प्रकृति और प्रेम का भी सुंदर चित्रण देखने को मिलता है। आज उनकी १२५वीं जयन्ती पर, श्रद्धावनत हैं 'पुष्प की अभिलाषा' के ये सुन्दर सुमन...





चाह नहीं मैं सुरबाला के


गहनों में गूँधा जाऊँ,


चाह नहीं प्रेमी-माला में,


बिंध प्यारी को ललचाऊँ;


चाह नहीं सम्राटों के शव,


पर, हे हरि, डाला जाऊँ,


चाह नहीं देवों के शिर पर,


चढ़ूँ, भाग्य पर इठलाऊँ,


मुझे तोड़ लेना वनमाली,


उस पथ पर देना तुम फेंक,


मातृभूमि पर शीश चढ़ाने,


जिस पथ जाएँ वीर अनेक.


-माखनलाल चतुर्वेदी




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देश भक्ति से ओत-प्रोत साहित्यक रचना के रचनाकार का जन्म दिवस याद दिलाने के लिए शब्दनगरी संगठन का धन्यवाद

देश भक्ति की ओजस्विता आदरणीय महान कविवर श्री माखनलाल चतुर्वेदी जी की इस रचना में है जो मन को छू लेती है , धन्यवाद शेयर करने के लिए ...

स्कूल के दिनों की याद ताजा हो गई , क्या दिन थे वो , यही सब तो प्रेरणा स्त्रोत हैं हमारे , जिनके शब्दों को पढ़कर आज कुछ लिखने का साहस कर पाता हूँ | ऐसे महान कवि को हजारों बार नमन और श्रद्धा सुमन अर्पण | शब्दनगरी संगठन को दिल से धन्यवाद |

डॉ. शिखा कौशिक
04 अप्रैल 2015

rashtr kavi makhanlal chaturvedi ji kee yah kavita deshbhakti kee ek misal hai .aabhar

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