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स्वाद (कविता)

05 अप्रैल 2015   |  रमेश कुमार सिंह

एक टॅाफी मिला।
जैसे गुल खिला।
कई दिनों से इन्तजार था।
उस टॅाफी के स्वाद का।
न जाने कैसा होगा स्वाद।
यही दिल के अन्दर आस।
तभी अचानक याद आई।
वो टॅाफी मेरे हाथ में आई।
स्वाद होगा कैसा आखिर।
चखकर देखें इसे जरुर।
तभी याद आये साथी लोग।
लिये स्वाद हम तीन लोग।
तब जाकर पता चला ऐसा।
है इसका स्वाद मिठा जैसा।
बहुत बहुत स्वादिष्ट लगा था।
कल्पना जैसा मन में था।
कल्पना जैसा मन में था••••!
~~~~~~~~रमेश कुमार सिंह ♌

रमेश कुमार सिंह

मैं हाईस्कूल रामगढ चेनारी रोहतास सासाराम बिहार में हिन्दी शिक्षक के रूप में कार्यरत हूं।कैमूर बिहार का रहने वाला हूँ।मेरी रूचि -पढाने साथ- साथ लेखन क्षेत्र में भी है।जो बातें मेरे हृदय से गुजर कर मानसिक पटल से होते हुए पन्नों पर आकर ठहर जाती है। बस यही है मेरी लेखनी।~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~मैं हाईस्कूल रामगढ चेनारी रोहतास सासाराम बिहार में हिन्दी शिक्षक के रूप में कार्यरत हूं।कैमूर बिहार का रहने वाला हूँ।मेरी रूचि -पढाने केसाथ साथले लेखन क्षेत्र में भी है।जो बातें मेरे हृदय से गुजर कर मानसिक पटल से होते हुए पन्नों पर आकर ठहर जाती है। बस यही है मेरी लेखनी।

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