छंद – तमाल” (सम मात्रिक )

07 जून 2018   |  महातम मिश्रा   (132 बार पढ़ा जा चुका है)

शिल्प विधान --चौपाई गुरु लघु (१६ ३=१९) अंत में यति

छंद तमाल” (सम मात्रिक )


गोकुल गलियाँ मोहन खेलें रास।

बंसी बाजे मधुवन कोकिल वास॥

दूर नगर बरसाना राधे गाँव।

कुंज गली में तुलसी श्यामा छाँव॥-१


नाचें गाएं झूमत ग्वाला बाल।

दधि-मुख लेपन फोरत हाँडी लाल॥

सखियाँ गागर लेके निकली राह।

कान्हा कंकर चुपके-छुपके चाह॥-२


नयन नजर की चूक मगन चितचोर।

मैना गाए गीत प्रीत वन मोर।

डाल कदम की बैठो मोहन आज।

यमुना प्यासी पय लाओ ऋतुराज॥-३


महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी

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