"पिरामिड"

07 जून 2018   |  महातम मिश्रा   (39 बार पढ़ा जा चुका है)

"पिरामिड"


ये

जग

जीवन

जनधन

पशु व पंक्षी

लगती है अच्छी

सागर मिली नदी।।-१


है

यह

संसार

उपहार

वाणी विचार

सुगमानुसार

जीव जीव से प्यार।।-२


महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी

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24 मई 2018
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