“कुंडलिया”

07 जून 2018   |  महातम मिश्रा   (107 बार पढ़ा जा चुका है)

 “कुंडलिया”

“कुंडलिया”


पलड़ा जब समतल हुआ न्याय तराजू तोल

पहले अपने आप को फिर दूजे को बोल

फिर दूजे को बोल खोल रे बंद किवाड़ी

उछल न जाए देख छुपी है चतुर बिलाड़ी

कह गौतम कविराय झपट्टा मारे तगड़ा

कर लो मनन विचार झुके न न्याय का पलड़ा॥


महातम मिश्र गौतम गोरखपुरी

अगला लेख: “मुक्तक”



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
07 जून 2018
“रातरानी का दिन सराबोर”जी तो करता है कि लाज शरम हया सब कुछ छोड़कर पोखरे में जाकर कूद पड़ूँ और पल्थी मारकर उसकी तलहटी में तबतक बैठी रहूँ जबतक मेरे हाथ पैर ठिठुर न जाय। यह गर्मी है कि आग की बारिस, सुबह होते ही पसीना चूने लगता है। बाबा के लगाए हुये पेड़ जो छाया व फल भी देते थे
07 जून 2018
28 मई 2018
“झरोखे से झाँकती सुबह”अमूमन हर रात को आने का अंदेशा पूर्ववत होता ही है शायद इस रात को भी खबर है कि आज नहीं तो कल मैं भी जरूर आऊँगी पर जब आई तो भावनाओं को झंझोड़कर एक नई सुबह कर गई और याद आने लगे वे दिन जो कभी रात को रात होने ही नहीं देते थे। कितना प्रकाश था उस विशाल मन में
28 मई 2018
28 मई 2018
“कता/मुक्तक.”छन्द- वाचिक गंगोदक (४० मात्रा क्रमागत दो-दो चरण तुकान्त मापनीयुक्त मात्रिक) मापनी - २१२ २१२ २१२ २१२ २१२ २१२ २१२ २१२ अथवा - गालगा गालगा गालगा गालगा गालगा गालगा गालगा गालगाचीन का दाँव ही पाक की ढाल है देख पाया कभी क्या उड़ा की गिरा।मुफ्त का माल है खा रहा पाल है
28 मई 2018
25 मई 2018
“मुक्तक”मुक्तक तेरे चार गुण कहन-शमन मन भाव। चाहत माफक मापनी मानव मान सुभाव। चित प्रकृति शोभा अयन वदन केश शृंगार-समतुक हर पद साथ में तीजा कदम दुराव॥-१ यति गति पद निर्वाह कर छंद-अछन्द विधान। अतिशय मारक घाव भरि मलहम मलत निदान। वर्तन-नर्तन चिन्ह लय कंठ सुकोमल राग- करुण-दरुण द
25 मई 2018
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x