मेहनत का ईनाम

07 जून 2018   |  पारुल   (108 बार पढ़ा जा चुका है)

" मेहनत इतनी ख़ामोशी से करो की सफलता शोर मचा दे | "

ये लाइन उन पे बहुत सही लगती हैं जो मेहनत करना जानते है ना की उन पे जो मेहनत न करके v सिर्फ बातें बनाना जानते हैं | हमारे घर काकी आती थी खाना बनाने उनकी तीन लड़कियां जो की सब कुछ थी काकी की | बेटा या बेटी कुछ भी मान ले | काकी ये मेहनत सिर्फ अपनी बेटियों को पढ़ने ki के लिए कर रही थी सपना था उनका की उनकी तीनो बेटियां अच्छे से पढ़ ले |

काकी जहां जहां खाना बनती वही से सब कुछ मांग लेती किताबें , कपड़े बस्ता और बहुत कुछ | बेटियां भी बहुत मेहनती थी काकी की | तीनो इंटर में फर्स्ट आयी इस बार काकी खुश तो बहुत थी पर आगे कैसे पढ़ेगी बेटियां ये भी चिन्ता थी | मगर जहां मेहनत होती हैं वहीं ईश्वर भी होता हैं | बड़ी आराम से डिग्री में दाखिला भी मिल गया समय बिता तीनो मास्टर भी कर ली फर्स्ट क्लास में अब तो काकी की खुशी का ठिकाना नहीं था | मिठाई खिलाई सब को मास्टर होते पे | अब काकी आगे की पढ़ाई के लिए सोच रही हैं की तीनों के नाम के आगे डॉ लगे | और ईश्वर ने उनकी ये भी इच्छा जल्दी ही पूरी कर दी | तीनो डॉ हो कर डिग्री में पढ़ने लगी | यहीं होती है मेहनत जो काकी के साथ उनकी तीनों बेटियों ने भी की |

यहां मेहनत बेटियों ने की लेकिन ईनाम काकी को मिला | कहानी छोटी सी पर यहां माँ का त्याग हैं वो चाहें बेटे के लिए हो या बेटी के लिए इसलिये इसका का नाम हैं मेहनत का ईनाम |

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