दर्द नहीं,मुस्कान बनो

07 अप्रैल 2015   |  दुर्गेश नन्दन भारतीय   (285 बार पढ़ा जा चुका है)

@@@@@@ दर्द नहीं,मुस्कान बनो @@@@@@
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न शैतान बनो,न हैवान बनो,भगवान् नहीं इन्सान बनो |
न भीड़ बनो, न भेड़ बनो , दर्द नहीं, मुस्कान बनो ||
दुश्मनी की गाँठे खोलो,मूँह से सोच-समझ कर बोलो |
प्रेम-अमृत जीवन में घोलो,नहीं कभी फिजुल में बोलो ||
न खुदगर्ज बनो,न मर्ज बनो,शर्म नहीं,पहचान बनो |
न भीड़ बनो, न भेड़ बनो , दर्द नहीं ,मुस्कान बनो ||
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