लड़कियों पर अत्याचार

10 अप्रैल 2015   |  निवेदिता चतुर्वेदी   (465 बार पढ़ा जा चुका है)

लड़कियों पर क्यों होते अत्याचार ,


मिलती है प्रताड़ना हर कदम पर ,


गलती चाहे जिसकी भी हो पर ,


सबकुछ सहन उसे ही करना पड़ता |





यह दुनिया भी अजीब सी हो गयी ,


सब देखते हुए अनजान बन गयी ,


उसकी भावनाओ को कोई नहीं समझता ,


लगता है सबकी मर चुकी है भावना |





सुनते नहीं आवाज कोई उसकी ,


वो किसे सुनाये दिल-दर्द अपनी ,


सारे कष्टो को अपने दिल में समेटे ,


बड़ी आकांक्षाओ को अंदर ही दबाये |





अंदर ही अंदर घूंट- घूंट कर जीती ,


आखिर कौन है सुनने वाले उसकी ,


जो भी बने हुए थे उसके अपने ,


वहीं ठहरने लगे है गुनहगार उसे |





ऐसी परिस्थिति क्यों बनी है उसकी ,


मैं भी कुछ समझ नहीं पाती |..


.....निवेदिता चतुर्वेदी ........




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सुन्दर अभिव्यक्ति !

धन्यबाद

सुन्दर रचना !
आभार!

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