आज का शब्द (१)

11 अप्रैल 2015   |  शब्दनगरी संगठन   (196 बार पढ़ा जा चुका है)

आज का शब्द (१)

किंकर्तव्यविमूढ़ :

१-दुविधा की स्थिति,


२-भौचक्का या अवाक रह जाना,


३-जो यह न समझ सके की उसे अब क्या करना चाहिए


जैसे-आपको कोई एक निर्णय तो लेना ही होगा कि जीवन में नौकरी करोगे या व्यापार, लेकिन इस तरह किंकर्तव्यविमूढ़ होकर बैठने से कोई लाभ नहीं होगा I





शुक्रवार, १० अप्रैल, २०१५

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यार मदारी! तुम अच्छे हो; रस्सी पर चल लेते हो, लोहे के छल्ले से कैसे ये करतब कर लेते हो? एक पैसे से दो फिर दो से, चार उन्हें कर देते हो; हाँ तो जमूरे कह-कह के, क्या से क्या कर देते हो I कालू-भालू और बंदरिया सबको नचाते एक उंगली पर, एक डुगडुगी की थापों पर सबका मन हर लेते हो I जीवन की पगडंडी पर, मु
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