आज का शब्द (२)

11 अप्रैल 2015   |  शब्दनगरी संगठन   (202 बार पढ़ा जा चुका है)

आज का शब्द (२)

लब्बोलुआब :

१-सारांश, सार, निचोड़, संक्षेप;


२-भावार्थ, तात्पर्य;


प्रयोग: उन लोगों की पूरी बात का लब्बोलुआब बस यही है कि उन्हें अधिक से अधिक पैसा चाहिए.








शनिवार, ११ अप्रैल, 2015

अगला लेख: आज का शब्द (३)



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
02 अप्रैल 2015
कहते हैं कि अगर बच्चों को मान-सम्मान का माहौल मिले तो उन्हें जीवन का लक्ष्य निर्धारण करने में आसानी होती है. यदि बच्चों को प्रेम और स्वीकृति का माहौल मिले तो वे दुनिया से प्रेम करना सीख जाते हैं. अगर बच्चे दोस्ती के माहौल में रहते हैं तो वे दुनिया को एक अच्छी जगह मानने लगते हैं. अगर बच्चों को प्रशंस
02 अप्रैल 2015
13 अप्रैल 2015
कैसे मनाएं बैसाखी, कैसे ढोल नगाड़े बाजें, कैसे करे भांगड़ा कोई, कैसे खेले कोई गिद्दा. फ़सल पकी थीं स्वप्नों में, आशाएं थीं अपनों में, मौसम ने पानी फेरा यूँ, अन्न के स्वर्णिम रत्नों में. पूरे बरस की खेती-कमाई, जाती रही सब हांथों से, जैसे खींचे जान कोई, आती-जाती साँसों से. दिन वो भी बैसाखी था, त
13 अप्रैल 2015
03 अप्रैल 2015
जनता में एक भाषा के माध्यम से ही एकता आ सकती है. दो भाषाएँ जनता को निश्चय ही विभाजित कर देंगी, यह एक अटल नियम है. भाषा के माध्यम से संस्कृति सुरक्षित रहती है. चूंकि भारतीय एक होकर सामान्य सांस्कृतिक विकास करने के आकांक्षी हैं, अतः सभी भारतीयों का यह अनिवार्य कर्त्तव्य है कि वह हिन्दी को अपनी भाषा के
03 अप्रैल 2015
सम्बंधित
लोकप्रिय
20 अप्रैल 2015
11 अप्रैल 2015
03 अप्रैल 2015
16 अप्रैल 2015
31 मार्च 2015
सा
13 अप्रैल 2015
11 अप्रैल 2015
11 अप्रैल 2015
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x