तू

12 अप्रैल 2015   |  सुशील चन्द्र तिवारी   (152 बार पढ़ा जा चुका है)

तू भी क्या और मैं भी क्या,


दोनों ने रस्में तोड़ दीं,


तूने दिल तोड़ा मेरा और,


मैंने क़समें तोड़ दीं ।

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