अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर प्रस्तुत दोहावली

21 जून 2018   |  महातम मिश्रा   (91 बार पढ़ा जा चुका है)

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर प्रस्तुत दोहावली


"दोहा"


भोर हुई निकलो सजन महके बगिया फूल।

हाथ पाँव झटकार लो आलस जाओ भूल।।-१


रात देर तक जागते दिन भर घोड़ा बेंच।

सोते हो तुम देर तक अब तो चादर खेंच।।-२


ऋषियों की यह देन है दुनिया करती योग।

बिन हर्रे बिन फिटकरी भागे सगरो रोग।।-३


ऋषियों की अद्भुत छटा देखो उनके केश।

जप तप साधक साधना ऐसा भारत देश।।-४


योगी का बल योग है भोगी भूला भान।

बिना योग काया व्यथित आलस रोगी मान।।-५


पहर दो पहर शाम को जब हो समय सुयोग।

उठक बैठक स्वांस भरो छोड़ो बाहर रोग।।-६


निर्मल जल भोजन पके पीओ जल भरपूर।

चबा चबा के दाँत से खाओ सखा खजूर।।-७


रगड़ रगड़ के हाथ मुँह दातुन कड़वी नीम।

नहलाओ मालिश करो दौड़ो बनो हकीम।।-८


गैया करती पागुरी बछवा भरे गुलाट।

बैल जुवाठा कांध पर पोछे कहाँ ललाट।।-९


जीव जंतु करते सभी अपने माफक योग।

घोड़ा सरपट दौड़ता रहता सदा निरोग।।-१०


शुभकामना अनेक है प्रति दिन करना योग।

अति उत्साहित एक दिन हो जाते हैं लोग।।-११


महातम मिश्र गौतम गोरखपुरी

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रेणु
21 जून 2018

वाह आदरणीय भैया -- आप तो सजन को योग लिप्त करके ही मानेगें | बहुत ही प्रेरक , मधुर दोहावली | सारा योग पिरो दिया शब्दों में | वाह और सिर्फ वाह !!!!!! आशा है आपने जरुर योग अपनाया होगा | आपके स्वास्थ्य के लिए हार्दिक शुभकामनाये |

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