मुस्लिम समाज का योग के प्रति नजरिया

24 जून 2018   |  Pratibha Bissht   (372 बार पढ़ा जा चुका है)

योग एक कला है | योग किसी खास धर्म , समुदाय, आस्था पद्धिति के मुताबिक नहीं चलता है | आमतौर पर योग को स्वास्थ्य और फिटनेस के लिए व्यायाम या थेरेपी के रूप में समझा जाता है | जो भी नियमित रूप से योगाभ्यास करता है वह इसका लाभ प्राप्त कर सकता है | उसका धर्म, जाति और संस्कृति जो भी हो | कुछ मुस्लिम धर्म गुरुओ का मानना है की योग को मजहब से जोड़ कर नहीं देखना चाहिए | दुनिया के बहुत से इस्लामी मुल्को ने 21 जून को अंतराष्ट्रीय योग दिवस मनाने की रवायत को अपनाया है | यूनाइटेड नेशन्स जनरल असेंबली के कुल 177 सदस्यों जिन्होंने अंतराष्ट्रीय योग दिवस को स्वीकार किया है उसमे 47 इस्लामिक मुल्क शामिल है | इस्लाम हमेशा से फिटनेस को बहुत प्रोत्साहित और प्राथमिकता देता है| इस मजहब में तंदुरुस्त रहने से जुडी हर चीज़ को बेहतर माना गया है | योग एक व्यायाम है और उसे उसी तरह से लिया जाना चाहिए | आज हज़ारो मुसलमान योग करते है | इस्लाम धर्म में भी कहा गया है की सूफी संगीत के विकास में भारतीय योग का काफी बड़ा योगदान है क्योकि योग मन की चंचलता पर रोक लगाता है और एकाग्रता बढ़ने में मदद करता है| सूफी संगीत तो ईश्वर की इबादत है और योग इस इबादत को बल देता है |


अगर हम इतिहास के पन्नो को उठा कर देखे और उन पर गौर करे तो आप पाएंगे की मिस्त्र में योग को "इस्लामी व्यायाम " करार दिया गया था | "नमाज़ को योग" और " योग को नमाज़ " बताया गया था क्योकि योग में मन और मस्तिष्क पर नियंत्रण रखा जाता है और नमाज़ में भी यही होता है|


अशरफ एफ निज़ामी ने योग विषय पर एक किताब लिखी है जिसमे उन्होंने " नमाज़ और योग " को एक बताते हुए लिखा है की नमाज़ और योग दोनों का उद्देश्य शारीरिक सफाई से ही है | जब नमाज़ क़याम के रूप में अदा की जाती है तो वो व्रजासन होता है |

नमाज़ में भी ध्यान लगाया जाता है और योग में भी यही होता है | सजदा करने के लिए इंसान जैसे एक्शन लेता है तो योग में उसे " शशांक आसान" कहा जाता है |

योग का अर्थ केवल शारीरिक और मानसिक परेशानियों से मुक्ति पाने से है ना की किसी धर्म विशेष से इसलिए इस्लामिक मुल्को में योग को गलत नहीं माना गया है | हालाँकि ये अलग बात है की कुछ कटरपंथियो ने योग को किसी समुदाय और धर्म विशेष से जोड़ दिया है |





बहुत सारे मुस्लिम बहुल देशो में योग खूब फल - फूल रहा है | इसका अंदाज़ा हम इस बात से लगा सकते है कि पाकिस्तान में योग बहुत प्रचलित हो रहा है, वहां इस्लामबाद, लाहौर और करांची जैसे बड़े शहरो में ही नहीं बल्कि पाकिस्तान के छोटे शहरो में भी कई लोगो को योग करते हुए देखा सकता है | उनके लिए योग एक स्वस्थ रहने की कला है | पाकिस्तान में टेलीविज़न पर योग से जुड़े हुए कार्यक्रम आना एक सामान्य बात है |


एक और मुस्लिम मुल्क ईरान में भी योग बहुत लोकप्रिय है वहाँ इसे खेल की तरह समझा जाता है | ईरान में योग फेडरेशन भी है| कुछ साल पहले ईरान के राजदूत गुलाम रजा अंसारी हरिद्वार में बाबा रामदेव के मशहूर पतंजलि योगपीठ पहुंचे थे | उस समय उन्होंने ईरान में योग को और प्रोत्साहन देने की बात कहीं थी|






बाबा रामदेव आज किसी पहचान के मोहताज़ नहीं है |बाबा रामदेव को योग गुरु के रूप में भी जाना जाता है क्योकि उन्होंने ना केवल देश बल्कि विदेशो में भी योग का प्रचार और प्रसार किया है | बाबा रामदेव केवल 8 साल के थे उनके शरीर पर पैरालिसिस या लक़वा का अटैक हुआ | जिससे उनके शरीर का आधा हिस्सा पूरी तरह ख़राब हो गया इससे उनकी बायी आँख पर ज़्यादा जोर पड़ा और उन्हें दिखना बंद हो गया| एक दिन उन्होंने योग की किताब पढ़ी जिसके पहले पेज पर लिखा था कि योग करने से मन और तन कन्ट्रोल किया जा सकता है | उन्होंने किताब पढ़ने के बाद नियमित रूप से योग करना शुरू किया और पैरालिसिस पर काबू पा लिया| बाबा रामदेव देश और विदेशो में जाकर योग शिवरो का आयोजन करते है | जिसमे हर समुदाय के लोग आते है |


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