क्या नेहरू के रक्षा मंत्री रहे वी के मेनन की अय्याशी के कारण भारत 1962 में चीन से हार गया?

26 जून 2018   |  अभय शंकर   (150 बार पढ़ा जा चुका है)

क्या नेहरू के रक्षा मंत्री रहे वी के मेनन की अय्याशी के कारण भारत 1962 में चीन से हार गया?

चीन के साथ लड़ाई में भारत क्यों हारा? क्या इसके पीछे नेहरू और उनके कुछ ‘करीबियों’ का ‘करेक्टर’ जिम्मेदार था? क्या नेहरू के रक्षा मंत्री रहे वी के मेनन ‘केरेक्टर’ के ढीले थे? क्या इन लोगों की अय्याशी भारत को भारी पड़ी? क्या इन्होंने अपनी अय्याशी के कारण भारत को हरवा दिया? क्या 1962 में चीन के हाथों भारत के बुरी तरह से हारने के पीछे ये एक वजह थी?

1962 की चीन के साथ हुई लड़ाई भारत की बड़ी हार थी. बेहद शर्मनाक तरीके से भारत हारा था उसमें. उसे लेकर कई कहानियां हैं. कि नेहरू को रत्तीभर भी अंदेशा नहीं था. कि चीन ऐसा भी कर सकता है. कि नेहरू ‘हिंदी चीनी भाई-भाई’ में व्यस्त थे और चीन ने हमला कर दिया. जो भी हो. ये हार न केवल विदेश नीति के हिसाब से, बल्कि रक्षा क्षमताओं के हिसाब से भी भारत के लिए बड़ी शर्मिंदगी थी. हम क्यों हारे? इसके जवाब में दर्जनों वजह गिनाई जाती हैं. कि भारत नया आजाद हुआ देश था. संसाधनों की कमी थी. भूखे पेटों को भरना और ऐसी तमाम बुनियादी चीजें सरकार की प्राथमिकता थीं. पाकिस्तान के साथ गर्मी में वैसे ही काफी खर्च हो चुका था. और हो रहा था. हथियार ही नहीं थे सेना के पास. वगैरह वगैरह. लेकिन सोशल मीडिया पर एक पोस्ट घूम रही है. इस पोस्ट के साथ एक तस्वीर है. इसमें नेहरू के करीबी रहे वी के मेनन की ‘अय्याशी’ को भी हार की वजह गिनाया गया है. ये पोस्ट हमारी आज की पड़ताल का मुद्दा है.

जिन साहब ने हमें ट्विटर पर टैग किया, उनका हैंडल कैप्टन जैक स्पेरो के नाम से है. जाहिर है, ये उनका असली नाम नहीं है.
जिन साहब ने हमें ट्विटर पर टैग किया, उनका हैंडल कैप्टन जैक स्पेरो के नाम से है. जाहिर है, ये उनका असली नाम नहीं है.

क्या है इस पोस्ट में?
हमारे एक पाठक ने ट्विटर पर हमें टैग करके एक तस्वीर दिखाई. उन्होंने हमसे इस तस्वीर का सच बताने को कहा. साथ में ये भी लिखा कि अगर ये फोटो सच्ची हुई, तब तो हम इसपर विडियो बनाने से रहे. उनके कहने का मतलब था कि हम पक्षपाती हैं. सो नेहरू के करीबियों की बुराई क्यों करेंगे. खैर. उनके टैग करने से इतना तो हुआ कि हमें ये फोटो दिखी और हम उसकी तफ्तीश कर रहे हैं. ये फोटो हमें और भी कई जगहों पर दिखी. 2015 की पोस्ट्स में. 2017 की पोस्ट्स में. 2018 में. फोटो में वी के मेनन हैं. मेनन स्वतंत्रता सेनानी थे. डिप्लोमेट थे. ब्रिटेन में आजाद भारत के पहले हाई कमिश्नर रहे. आगे चलकर रक्षा मंत्री भी बनाए गए. मेनन के साथ इस फोटो में दो लड़कियां नजर आ रही हैं. दोनों लड़कियां बिकिनी में हैं. मेनन उनसे बात कर रहे हैं. फोटो के साथ दो कैप्शन हैं. एक ऊपर की तरफ. दूसरी नीचे. ऊपर वाले कैप्शन में लिखा है-

1962 की लड़ाई लड़ते कांग्रेसी रक्षा मंत्री

नीचे कैप्शन में लिखा है-

भारत के ऐय्याश और नकारा रक्षा मंत्री ने ब्रिटिश और चीनी लड़कियों से ऐय्याशी के चक्कर में 1962 में भारत का मानसरोवर सहित 72,000 वर्गमील क्षेत्र चीन को भेंट कर दिया और हजारों भारतीय सैनिकों को मरवा डाला. ये रंगीले चाचा के नक्शे कदम पर चलते थे.

लिखने वाला रंगीले चाचा लिखकर असल में नेहरू लिखना चाहता था. मतलब इस एक पोस्ट में वी के मेनन और जवाहर लाल नेहरू, दोनों का करेक्टर नापा गया है.

ये पोस्ट अभी की नहीं है. पुराना चावल है. हमें 2015 में इसे शेयर करने वाले लोग भी मिले.
ये पोस्ट अभी की नहीं है. पुरानी है. हमें 2015 में इसे शेयर करने वाले लोग भी मिले.
इसमें आपको पूरा मेसेज साफ-साफ पढ़ने में आ जाएगा.
इसमें आपको पूरा मेसेज साफ-साफ पढ़ने में आ जाएगा. अच्छा, ज्यादातर तस्वीरों के नीचे ‘मोदी सेना’ वाला मार्क नजर आया. मतलब शायद इनका सोर्स कोई एक ही है.

नेहरु ने की थी हिन्दुस्तान के साथ गद्दारी ……………………!
कांग्रेस के नेता तथा गाँधी परिवार अपने मुहं से ये…

Posted by Vande Mataram- Jai Hind Jai Bharat on Monday, September 14, 2015

पोस्ट की असलियत क्या है?
ये सारी बातें एक तस्वीर से शुरू हुईं. जाहिर है, पहले तस्वीर की ही पोस्टमॉर्टम की जाए. इस फोटो के ऊपर ‘हिस्टॉरिक इमेजेस’ का वॉटरमार्क है. ये एक वेबसाइट है. पूरा नाम है- द हिस्टॉरिक इमेजेस आउटलेट. वहां पर ये तस्वीर मिली, लेकिन फोटो अंतरराष्ट्रीय न्यूज एजेंसी AP की है. इस इमेज को 1955 में लिया गया था. इस फोटो के साथ एक कैप्शन भी है. अंग्रेजी में लिखा है. जो लिखा है, उसका हिंदी अनुवाद हम आपको पढ़ाते हैं. कई बातें चीजें साफ हो जाएंगी. लिखा है-

वॉशिंगटन, 2 जुलाई. डिप्लोमेट ऐट ईज़. वी के कृष्ण मेनन, यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका में भारत के राजदूत बीती रात रिलेक्स मूड में. तस्वीर में वो एक प्राइवेट स्विमिंग पार्टी अटेंड कर रही दो युवा विदेशी छात्रों से बात कर रहे हैं. मेनन ने जापान की मिशिको नागाशिमा के सिर पर अपना हाथ रखा हुआ है, वहीं वो स्पेन के बार्सिलोना की रहने वाली पिलारिन मार्टिन्ज से बात कर रहे हैं. ये दोनों लड़कियां अमेरिका के दौरे पर आए विदेशी छात्रों के एक ग्रुप का हिस्सा हैं. इन छात्रों ने अपने एक साल का शैक्षणिक प्रशिक्षण पूरा कर लिया है (1955)

इस तस्वीर की कीमत है 10 डॉलर. ये रकम चुकाने के बाद आप इसे डाउनलोड कर सकते हैं. पैसा देने के बाद इसके ऊपर से ये वॉटरमार्क हट जाएगा. लगता तो यही है कि ये फोटो यहीं से चुराई गई है. वो भी बिना पैसा दिए.
इस तस्वीर की कीमत है 10 डॉलर. ये रकम चुकाने के बाद आप इसे डाउनलोड कर सकते हैं. पैसा देने के बाद इसके ऊपर से ये वॉटरमार्क हट जाएगा. लगता तो यही है कि ये फोटो यहीं से चुराई गई है. वो भी बिना पैसा दिए.

ये लड़कियां न तो चीन की हैं, न ब्रिटेन की
वायरल पोस्ट के मुताबिक, फोटो में वी के मेनन ब्रिटिश और चीनी लड़कियों के साथ हैं. AP के कैप्शन के मुताबिक, इन दोनों में से एक लड़की स्पेन की है. दूसरी जापान की है. दूसरी बात. फोटो देखकर अय्याशी का कैसे पता चलता है? मतलब वी के मेनन ऐसा क्या करते दिख रहे हैं कि उनको अय्याश मान लिया जाए? अगर ये तस्वीर उनकी अय्याशी का सबूत है, तो इस तस्वीर में अय्याशी जैसा कुछ होना तो चाहिए था. दो बिकिनी पहनी लड़कियों के साथ बात करना अगर अय्याशी है, तो बिकिनी पहनना भी अय्याशी होता होगा! जिन लोगों को बिकिनी अय्याशी और अश्लीलता लगता है, उनकी मानसिक स्थिति के ऊपर कुछ बोलना ही क्या? बेकार है उनके ऊपर उर्जा खर्च करना.

ये ऑरिजनल फोटो के साथ दिए गए कैप्शन का स्क्रीनशॉट है (फोटो: हिस्टॉरिक इमेजेस आउटलेट)
ये ऑरिजनल फोटो के साथ दिए गए कैप्शन का स्क्रीनशॉट है (फोटो: हिस्टॉरिक इमेजेस आउटलेट)

जब ये फोटो ली गई, तब मेनन किस पोस्ट पर थे?
अब एक और जरूरी बात. कि क्या ये तस्वीर लिए जाते समय वी के मेनन रक्षा मंत्री थे? जवाब है, नहीं. 1955 में मेनन अमेरिका में भारत के राजदूत थे. मेनन मुख्य तौर पर डिप्लोमेट थे. हां, वो रक्षा मंत्री बने. लेकिन बाद में. अप्रैल 1957 से नवंबर 1962 तक वो भारत के डिफेंस मिनिस्टर रहे. चीन ने 20 अक्टूबर, 1962 को भारत के ऊपर हमा किया. नवंबर खत्म होते-होते भारत जंग हार चुका था. तो हां, युद्ध के दौरान वी के मेनन ही रक्षा मंत्री थे. मगर उन अकेले को इस हार के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है. ये कलेक्टिव हार थी. और न ही इसके लिए किसी का करेक्टर जिम्मेदार था.

टाइम मैगजीन ने 1962 में अपने मैगजीन के कवर पर वी के मेनन को जगह दी. उनके पीछे एक सांप था. और सपेरे की बीन किनारे से झांकती नजर आ रही थी. टाइम ने अपने इस कवर पर वी के मेनन को किसी सपेरे की तरह दिखाया था.
टाइम मैगजीन ने 1962 में अपने मैगजीन के कवर पर वी के मेनन को जगह दी. उनके पीछे एक सांप था. और सपेरे की बीन किनारे से झांकती नजर आ रही थी. टाइम ने अपने इस कवर पर वी के मेनन को किसी सपेरे की तरह दिखाया था.

मेनन के बारे में थोड़ा जान लीजिए
मेनन का जिक्र होते ही कश्मीर याद आता है. उनके बारे में मशहूर था कि वो घंटों बिना थके कश्मीर पर बात कर सकते हैं. एक बार की बात है. 1957 का साल था. तारीख शायद 23जनवरी थी. संयुक्त राष्ट्र संघ के सुरक्षा परिषद् में कश्मीर की चर्चा छिड़ी. मेनन उस समय UN में भारत के प्रतिनिधि थे. मेनन बोलने के लिए खड़े हुए. कहते हैं कि वो आठ घंटे तक बोलते रहे. उनके इस भाषण को UN के अब तक के इतिहास का सबसे लंबा भाषण माना जाता है. ब्रिटेन उनको ज्यादा पसंद नहीं करता था. ब्रिटिश खुफिया एजेंसी को लगता था कि मेनन रूस समर्थक हैं. वामपंथी हैं. कि अफ्रीकी देशों की आजादी का समर्थन करते हैं. वैसे अंग्रेज आजादी के पहले भी मेनन को पसंद नहीं करते थे. मेनन का मुंहफटपन बड़ा मशहूर है. जो होता था, कह देते थे. एक किस्सा ये है कि एक बार एक अंग्रेज लेखक ने मेनन की अंग्रेजी की तारीफ कर दी. मतलब अचरज जताया. कि हिंदुस्तानी होकर भी उनकी अंग्रेजी इतनी अच्छी कैसे. इसपर मेनन ने जवाब दिया-

मेरी अंग्रेजी आपसे अच्छी है. आपकी तो ये भाषा है, मैंने तो इसे सीखा है.

मेनन शराब खूब पीते थे. बड़े भावुक थे. एक बार शराब पीकर लड़खड़ाते हुए वो नेहरू के कमरे में घुस गए थे. उनके इस पीने के आदत की शिकायतें आईं. तो नेहरू ने अपने निजी सचिव एम ओ मथाई को लंदन भेजा. जांच के लिए. मथाई ने आकर रिपोर्ट दी. इसमें लिखा था कि मेनन ने धमकी दी है. कि अगर उन्हें पद से हटाया गया, तो वो खुदकुशी कर लेंगे. जो भी हो, नेहरू ने मेनन को हटाया नहीं. किसी दिन तसल्ली से आपको मेनन साहब के बारे में बताएंगे. एक से एक दिलचस्प चीजें हैं उनसे जुड़ी. मस्त किस्से हैं. मगर वो बाद की बात.


अगर आपको भी ऐसी ही कोई पोस्ट वायरल होते हुए दिखती है, तो हमें बताइए. अगर आपको किसी पोस्ट पर शक है, आप उसकी सच्चाई मालूम करना चाहते हैं, तो हमें लिखिए. हम उसकी पड़ताल करके सच बताएंगे. आप हमें lallantopmail@gmail.com पर मेल कर सकते हैं. या फिर फेसबुक के हमारे इनबॉक्स में अपना मेसेज छोड़ सकते हैं.


Defense Minister V K Menon's womanizing habits with Chinese and British girls led to India's defeat at the hands of china in 1962, claims a viral post

https://www.thelallantop.com/jhamajham/defense-minister-v-k-menons-womanizing-habits-with-chinese-and-british-girls-led-to-indias-defeat-at-the-hands-of-china-in-1962-claims-a-viral-post/

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