उन्होंने मुझको मारा

26 जून 2018   |  vikas khandelwal   (86 बार पढ़ा जा चुका है)


उन्होंने मुझको अकेलेपन कि शिदत से मारा



अब मुझको नफरत हो गई है ,



उनसे और उनकी मोह्बत से



आईना टूट गया है दिल का, उनकी बेरुखी से


अब मुझको नफरत हो गई है,



उनसे और उनकी सुरत से



लब तक उनके ले आई, मुझको प्यास मेरी



अब अपने आप को वापस खिच लुँगा, उनके करीब से



और वादा ले लुँगा, उनके करीब न जाने का,



अपने दिल कि हर हसरत से



वो है सितमगर तो सितमगर ही रहे, उम्र भर



मे अपने ज़ख्मो का हिसाब, उनसे यु लुँगा



प्यार अब उनसे नहीं करूँगा ,



कर लुँगा प्यार चाहे किसी बेजान मुरत से



वो फ़रेब का चेहरा होकर भी,



मुझ से फरेब न कर पाए



ऐसे दुश्मनो को मेरा 'सलाम'



और फरेब कि इस दुनिया मे, फरेब खाया है मैंने



मेरे अजीज ओ जा निसार दोस्त से



उन्होंने मुझको अकेलेपन कि शिदत से मारा



जिनको दि दुआ उन्होंने बदुआओ से मारा



मैं अकेला कितनी बार मरु



हर बार मरके जिन्दा हो जाता हु किस्मत से























अगला लेख: तुम्हारी मोहबत मे दम कम है



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
05 जुलाई 2018
मि
मेरे आँसू , मेरा दर्द , मेरा गम कोई लेने वाला हो, तो बताना मैं जिन्दगी को जीना चाहता हु एक मासूम बच्चे की तरह कोई मुझसे प्यार करने वाला हो तो बताना मेरी आरजु बस इतनी है कोई
05 जुलाई 2018
29 जून 2018
दि
बारिश के इस सुहाने मौसम मे दिल मेरा तुझे याद करता है वो साथ भीगने के ज़माने याद करता है भीगी हुई रातो कि वो , बाते याद करता है बारिश के इस सुहाने मौसम मे तुम्हारी हॅ
29 जून 2018
29 जून 2018
ते
अबकी बार बारिश जो बरसे तो मेरी आँखों से बरसे मेरे महबूब तोडा तो दिल तुमने है तो क्यु ना मेरी याद मे,तेरी आँखों से लहु बरसे जैसे मैं तरस रहा हु
29 जून 2018
26 जून 2018
प्
gjjax esa Mwck jgrk gwWgj:i dh ckr eSa djrk gwW eSa doh Hkh gwW vkSj 'kk;j Hkh gj ckr dks fny ls dgrk gwW gjlqcg eq>ls gksrh gSgj'kke esa] eSa gh gksrk gwW dqN vkSj u le>ks I;kj gwW eSa eSa lcds fny esa clrk gw
26 जून 2018
30 जून 2018
मु
मुझको प्यार मे तन्हाई मिली आपको क्या मिला साथ चलते थे वो मेरे ,तो लगता था खुदा साथ है अब जुदा हो गए है वो मुझसे, तो यु लगता है, जिस्म हि ख़ाली रह गया है मेरे पास,जान
30 जून 2018
30 जून 2018
दु
दर्द का दुसरा नाम महबूब है काटो सा चुभता गुलाब है मेरी पुरानी खताओं को माफ़ कर दो तो पेश ए खिदमत , एक नई खता जनाब है दर्द वो हि देते है, जो दिल मे रह
30 जून 2018
15 जून 2018
तु
ना कोई कविता है ना कोई ग़ज़ल है भुल गए है जबसे वो हमको दुनियाँ कि भीड़ मे अकेले हम है देखता हु उनको तो यु लगता है ख़ुदा है या आँखों का भरम है लेकिन उनसे अब कैसे मिलु दूर
15 जून 2018
04 जुलाई 2018
जि
जिन्दगी रही तो तुझसे मिलेंगे जरूर तेरे दिल मे रहेंगे , नैनों मे रहेंगे,तेरी यादो में रहेंगे, कही भी रहे,मगर रहेंगे जरूर बादल आ गए है जो, मोह्बत कि बारिश लेके तो तेरे
04 जुलाई 2018
06 जुलाई 2018
मे
मैं तेरा हु सिर्फ तेरा एतबार कर मेरा चिराग़ बनके जला हु तो ये रौशनी रहेगी उमर भर एतबार कर मेरा मै तेरा हु सिर्फ तेरा मुझको अपने दिल मे बसा लो कब तलक
06 जुलाई 2018
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x