ज़िंदगी

27 जून 2018   |  रितिका दीक्षित गौतम   (112 बार पढ़ा जा चुका है)

 ज़िंदगी

ज़िंदगी तू है और एक मैं

समझना तुझे चाहती हूँ

तू मेरी समझ से है दूर,बहुत दूर

कभी छू कर महसूस करना चाहुँ , तो

लगता है, तू भाग रही है |

तुझे बढ़कर रोकना चाहुँ , तो

लगता है, तू पहले से ही थमी है |

हर पल रंग बदलती है तू,

कभी बहुत फीके तो कभी बहुत स्याह

जब भी चाहुँ तेरे रंग में रंगना

उसी पल रंग बदलती है तू



 ज़िंदगी
 ज़िंदगी
 ज़िंदगी
 ज़िंदगी

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आलोक सिन्हा
18 जुलाई 2018

काफी अच्छा लिखा है | मैंने भी इस पर कुछ लिखने का प्रयत्न किया है __ ज़िंदगी क्या है क्या बताऊँ मैं
एक गूंगे का ख्वाब हो जैसे
या किसी लालची महाजन का
उलझा उलझा हिसाब हो जैसे
2 --ज़िंदगी एक दर्द भी है गीत भी है
ज़िंदगी एक हार भी है जीत भी है
तुम इसे यदि प्यार का मधुर साज समझो
तो ये सौ खुशियों भरा संगीत भी है

आलोक सिन्हा
18 जुलाई 2018

काफी अच्छा लिखा है | मैंने भी इस पर कुछ लिखने का प्रयत्न किया है __ ज़िंदगी क्या है क्या बताऊँ मैं
एक गूंगे का ख्वाब हो जैसे
या किसी लालची महाजन का
उलझा उलझा हिसाब हो जैसे
2 --ज़िंदगी एक दर्द भी है गीत भी है
ज़िंदगी एक हार भी है जीत भी है
तुम इसे यदि प्यार का मधुर साज समझो
तो ये सौ खुशियों भरा संगीत भी है

आलोक सिन्हा
18 जुलाई 2018

काफी अच्छा लिखा है | मैंने भी इस पर कुछ लिखने का प्रयत्न किया है __ ज़िंदगी क्या है क्या बताऊँ मैं
एक गूंगे का ख्वाब हो जैसे
या किसी लालची महाजन का
उलझा उलझा हिसाब हो जैसे
2 --ज़िंदगी एक दर्द भी है गीत भी है
ज़िंदगी एक हार भी है जीत भी है
तुम इसे यदि प्यार का मधुर साज समझो
तो ये सौ खुशियों भरा संगीत भी है

आलोक सिन्हा
18 जुलाई 2018

काफी अच्छा लिखा है | मैंने भी इस पर कुछ लिखने का प्रयत्न किया है ज़िंदगी क्या है क्या बताऊँ मैं
एक गूंगे का ख्वाब हो जैसे
या किसी लालची महाजन का
उलझा उलझा हिसाब हो जैसे
2 --ज़िंदगी एक दर्द भी है गीत भी है
ज़िंदगी एक हार भी है जीत भी है
तुम इसे यदि प्यार का मधुर साज समझो
तो ये सौ खुशियों भरा संगीत भी है

बहुत बहूत ही अच्छा मुझे कुछ समय लगेगा शायद इस लेवल पर पहुंचने के लिए

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18 जून 2018
हा
मिल जाए जो तेरा साथ, हालात-ए ज़िन्दगी में। वरना ज़नाज़े अक्सर यहाँ, हर पल निकलते हैं1 शख़्सियत में जो लोग, सराबोर हैं तेरे। वो हर शख़्स मिलने की, तमन्ना दिल में रखता है।।2 वफ़ा का नाम लेते हो,सफ़ा न मुँह से कहते हो। तुम तो ऐसे वन्दे हो,जो फ़िजूल बदनाम करते हो।।3मर रहे हैं जो
18 जून 2018
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