तेरी आँखों से लहु बरसे

29 जून 2018   |  vikas khandelwal   (115 बार पढ़ा जा चुका है)

अबकी बार बारिश जो बरसे



तो मेरी आँखों से बरसे



मेरे महबूब तोडा तो दिल तुमने है



तो क्यु ना मेरी याद मे,



तेरी आँखों से लहु बरसे



जैसे मैं तरस रहा हु



तू भी इस सावन के मौसम मे



किसी के प्यार को तरसे



मेरे महबूब तोडा तो दिल तुमने है



अब कि बार सावन ऐसा बरसे



इस कदर बरसे



होके दिवाना बरसे



हर आशिक कि आँख से, सावन बरसे



प्यासी धरती कि तरह मेरा मन



रिमझिम कि बूंदो को तरसता है



जल चुके अरमानो कि बस्ती मे



दिल तेरी तस्वीर ढूंढ़ता है



शोला हु मैं दहकती हुई हसरतो का



बुझ जाऊ जो अगर , तेरे बदन से होके



अबकी बार मुझ पे सावन बरसे



अबकी बार बारिश जो बरसे












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रेणु
01 जुलाई 2018

मर्मस्पर्शी रचना !!!!!!

vikas khandelwal
24 जुलाई 2018

आपका धन्यवाद

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