सडक और हम

01 जुलाई 2018   |  गौरीगन गुप्ता   (55 बार पढ़ा जा चुका है)


सुरक्षा नियमों का करना हैं सम्मान.

धुँआ छोडती कोलाहल करती,

एक-दो,तीन,चारपहिया दौड़ती,

लाल सिंग्नल देख यातायात थमता,

जन उत्सुकतावश शीशे से झांकता.

+++++

बीच सडक चौतरफा रास्ता,

तपती दुपहरी में छाता तानता,

जल्दी निकलने को हॉर्न बजाता,

वाहनों के बीच फोन पर बतियाता.

++++++

लालबत्ती का ध्यान रखते,

दायें-बाएं देख वाहन चलाते,

सुरक्षा नियमों का सम्मान करते,

अनमोल जीवन की सलामती रखते.

++++++

कारखाना काला धुँआ निकालती,

सुविधापरस्ती वाहनों की भीड़ बढाती,

शहरीकरण में सड्के पर सड़के बनती जाती,

हरे-भरे वृक्षों के कटने से हरियाली घटती जाती.

++++++

वाहनों की आवाजे कर्णभेदती,

सारे वातावरण को प्रदूषित करती,

मशीनरी सा जन जीवन जीती ,

कई बीमारियों का शिकार होती.

++++++

आसमां छूती ऊंची इमारतें ,

झुग्गी झोपड़ियों को दबाते,

चारपहिया वाहन शान दिखाते,

दुपहियों को कुचल,निकल जाते,

+++++++

यातायात का हिस्सा हैं अपना जीवन,

जिससे बन जाती हैं जिन्दगी आसान,

बात पते की ,सदा खुशहाल रखना हैं जीवन,

तो भैय्या ,सुरक्षा नियमों का करना हैं सम्मान.

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