जो ये श्वेत,आवारा , बादल -कविता

05 जुलाई 2018   |  रेणु   (64 बार पढ़ा जा चुका है)

जो ये  श्वेत,आवारा , बादल -कविता  - शब्द (shabd.in)

जो ये श्वेत,आवारा , बादल -
रंग -श्याम रंग ना आता –
कौन सृष्टि के पीत वसन को-
रंग के हरा कर पाता ?

ना सौंपती इसे जल संपदा –
कहाँ सुख से
नदिया सोती ?

इसी जल को अमृत घट सा भर-

नभ से कौन छलकाता ?

किसके रंग- रंगते कृष्ण सलोने
घनश्याम कहाने खातिर ?

इस सुधा रस बिन कैसे -

चातक अपनी प्यास बुझाता ?

पी छक जो तृप्त धरा ना होती –

सजती कैसे नव सृजन की बेला ?

करता कौन जग को पोषित –
अन्न धन कहाँ से आता ?

किसकी छवि पे मुग्ध मयूरा

सुध बुध खो नर्तन करता ?

कोकिल का सु स्वर दिग्दिगंत में

आनंद कैसे भर पाता ?

टप-टप गिरती बूंदों बिन -

कैसे आंगन में उत्सव सजता ?

दमक दामिनी संग व्याकुल हो

जो मेघ - राग मल्हार ना गाता ?

कहाँ से खिलते पुष्प सजीले,

कैसे इन्द्रधनुष सजता ?

विकल अम्बर का ले सन्देशा
कौन धरा तक आता ? ?????????


अगला लेख: पुण्यस्मरण बाबा नागार्जुन -- जन्म दिन विशेष --



उदय पूना
04 दिसम्बर 2018

प्रिय रेणु, प्रणाम, सुन्दर रचना, सुन्दर प्रकृति केलिए, सुन्दर मन के द्वारा; ''' जो ये श्वेत,आवारा , बादल -
रंग -श्याम रंग ना आता –
कौन सृष्टि के पीत वसन को-
रंग के हरा कर पाता ?"" बधाई, शुभकामनाएं

रेणु
04 दिसम्बर 2018

आदरणीय सर आपकी सराहना और स्नेहाशीष के लिए कोई आभार नहीं - बस सादर नमन |

ममता
03 दिसम्बर 2018

ना सौंपती इसे जल संपदा –
कहाँ सुख से नदिया सोती ?
इसी जल को अमृत घट सा भर-
नभ से कौन छलकाता
बहुत ही शानदार रचना रेनू जी | बधाई

रेणु
04 दिसम्बर 2018

ममता जी सस्नेह आभार और अभिनन्दन |

शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
अंग्रेजी  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x