11 जुलाई विश्व जनसंख्या दिवस और भारत

10 जुलाई 2018   |  शोभा भारद्वाज   (81 बार पढ़ा जा चुका है)

11 जुलाई विश्व जनसंख्या दिवस और भारत - शब्द (shabd.in)

11 जुलाई विश्व जनसंख्या दिवस और भारत


डॉ शोभा भारद्वाज


विश्व में 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस मनाया जाता है |जिस तेजी से अनियमित रूप से जनसंख्या की वृद्धि हो रही है जबकि सार्थक जनसंख्या की वृद्धि कम है चिंता का विषय है देश का विकास गरीब बिमार, अस्वस्थ और बेरोजगारों की भीड़ से संभव नहीं है किसी भी देश का बजट ऐसे लोगों को ज़िंदा रखने उनके भरण पोषण कमजोर भूखी सूखी जनता का पेट भरने, स्वास्थ्य सेवा में निकल जाएगा भूखों की भीड़ सब कुछ चुग जायेंगे धरती पर पेड़ भी दिखाई नहीं देंगे विकास कहाँ से होगा ?टैक्स पेयर भी कहाँ तक ऐसे गरीब वर्ग का बोझ ढो सकेंगे | पहली बार जनसंख्या दिवस सन् 1987 में मनाया गया था क्योंकि इस दिन दुनिया की जनसंख्या ने 500 करोड़ के आँकड़े को छुआ था। विश्व के तीसरी दुनिया के गरीब देशों के नौजवानों को संदेश देने की कोशिश की गयी थी कि बेतहाशा बढ़ती जनसंख्या के कारण विकास क्या सम्भव है, स्वास्थ्य सुविधायें, बेरोजगारी दूर करना आसान होगा ? हमारे विकास शील देश के लिये जनसंख्या पर कंट्रोल करना अत्यावश्यक है । प्रदूषित गटर और नालों के किनारे झोंपड़ियाँ बना कर नारकीय जीवन जीने के लिये इन्सान मजबूर हैं। शहरों की गंदगी ढोते- ढोते नदियाँ प्रदूषित हो रहीं है जनसंख्या को खिलाने के लिए धरती का कितना दोहन किया जा सकता है ,देश भी लोक कल्याणकारी राज्य कब तक रह पायेगा ?


नेता जब भाषण देने आते हैं भारी भीड़ का जमावड़ा देख कर उत्साहित होते हैं भाषण में भी जोश आ जाता है लेकिन यही जनसंख्या जब दिन दूनी रात चोगुनी बढ़ती है सोच से पसीना आ जाता है कौन सा देश है जहाँ भारतीय रोजी रोटी अच्छे जीवन की आस में कमाने जाते हैं कैसे जाते हैं? ,विदेश में किन कष्टों से गुजरते हैं वही जानते हैं क्या अब जाना संभव है? तेल की कीमते कम होने से तेल उत्पादक देशों की अर्थ व्यवस्ता पर बहुत असर पड़ा है वहाँ रोजगार के अवसर घटे हैं , योरोप स्वयं मंदी की आग में जल रहा है,हर योरोपियन देश की सीमा पर ईराकी ,सीरिया और अफगानी ही नहीं अफ्रीकन देशों के नागरिक भी दस्तक दे रहे हैं भारत में कुछ प्रान्तों के नौजवान अपने खाते पीते घरों के हैं लेकिन अपना सब कुछ बेच कर किसी भी तरह यूएस , कनाडा एवं योरोपियन देशों में जाने के इच्छुक रहते हैं ‘देश में शाह परदेस में बेहाल’, लेकिन अब योरोप के देशों में राष्ट्रवाद की प्रवृति बढ़ती जा रही है उन्हीं दलों को वोट दिया जाता है जो प्रवासियों को देश से निकाल कर अपनों को रोजगार देने का वायदा करते हैं जब अपने नागरिक बेरोजगार है कौन उनको बर्दाश्त करेगा प्रवासियों के खिलाफ क्राईम बढ़ रहा है कई देशों से प्रवासियों का सब कुछ छींन कर उन्हें निकाल दिया गया |


विकसित देशों की अपनी आबादी कम हो रही है लोग बच्चे पैदा करने से डरते हैं दूसरे देश वासी उनका स्थान भरना चाहते हैं प्रजातन्त्रात्मक व्यवस्था में धीरे-धीरे प्रवासी ही सत्ता पर अपना दबदबा बना लेते हैं |मिडिल ईस्ट के मुस्लिम देश किसी को नागरिकता नहीं देते आप काम कीजिये आपको वर्क परमिट मिलेगा सुउदिया में पहली नागरिकता दी गयी वह भी एक रोबर्ट को लेकिन अन्य देशों में शरणार्थियों के लिए मानवाधिकार वादी आगे आ जाते हैं अमेरिकन राष्ट्रपति ट्रम्प ने रिफ्यूजियों को रोकना चाहा मानवाधिकार वादियों ने हंगामा खड़ा कर दिया | भारत में रोहनगिया मुस्लिम को शरण देने की वकालत करने के लिए जलूस निकाले गये जबकि मुस्लिम देशों के द्वार उनके लिए बंद हैं|


पढ़े लिखे जवान विवाह की जिम्मेदारी से घबरा रहे हैं | प्राईवेट नौकरियों में अनिश्चितता बनी रहती है कभी भी काम से निकाले जाने का भय अत :सन्तान को जन्म देने से डरते हैं ज्यादातर काफी उम्र होने के बाद लड़का हो या लड़की एक बच्चे को जन्म देने की हिम्मत करते हैं उनके भी भविष्य का पूरा हिसाब किताब पहले ही तय होता है उनको वह सब कुछ देना चाहते हैं जिनका उनके पास अभाव था |लोअर मिडिल क्लास विवाह भी करते हैं दो बच्चे भाई बहन का जोड़ा चाहते हैं लेकिन एक ऐसा वर्ग हैं जाहिलता में बच्चों की संख्या बढ़ाता रहता है भगवान भरोसे या सरकार भरोसे ? बेटे की चाहत में बालिकाओं की संख्या बढ़ाते जाते हैं जबकि बेटियाँ भी अपने माता पिता का ध्यान रखतीं है |महानगरों में झुग्गियों में बसे लोगों के बच्चों की संख्या देख कर हैरानी होती है कुछ बच्चों के सहारे अच्छे दिनों का इंतजार करते हैं कुछ बच्चों को अल्लाह या ईश्वर की देन मान कर पैदा करते हैं ऐसे विचारों वाले पढ़े लिखे भी है एक या दो बच्चों पर संतुष्ट नहीं होते कम से कम चार बच्चों की इच्छा रखते हैं बच्चों को जन्म देना आसान हैं लेकिन उनका भरण पोषण ? धरती जनसंख्या के हिसाब से खिच कर बड़ी ,‘छोटी या चपटी नहीं होती गोल धरती अपनी धुरी पर घूमती रहती है अब जनसंख्या के बोझ को ढोने में असमर्थ हो चुकी है तपने लगी है |


जीने के लिए शुद्ध हवा स्वच्छ पानी पैर टिकाने के लिए जमीन भी चाहिये बढ़ती जनसंख्या में स्वच्छ हवा का महत्व ही खत्म कर दिया है बढ़ते प्रदूष्ण से बड़े और छोटे बेहाल हैं पीने के लिए स्वच्छ जल महानगरों में पहुंचाना मुश्किल है कुछ क्षेत्रों में सूखे के कारण त्राहि त्राहि मची रहती है लोग गंदा पानी पीने के लिए मजबूर, जब इन्सान के लिए पानी नहीं है तो जानवरों को कहाँ से मिलेगा गावों, कस्बों ,शहरों में तालाब पाट कर घर बना लिए पहले बरसात में तालाब लबालब जल से भर जाते थे धरती में भी पानी समाता रहता था जिससे पूरे वर्ष कुओं से जल मिलता था , हैंड पंप से भी कुछ हाथ की दूरी पर पानी मिल जाता था लेकिन अब पानी धरती में बहुत नीचे तक खोदने पर मिलता है 2030 आते-आते पीने का पानी मुश्किल हो जायेगा बिना जल के जीने की कल्पना असम्भव है अटल जी ने कहा था अगली लड़ाई जल के लिए होगी |


बढ़ती जनसंख्या रहने के लिए नदियों के और भी करीब घर बनाने लगते हैं नदियाँ अपना मार्ग कभी नहीं छोडती जैसे ही जम कर पानी बरसता है सब कुछ बहा कर ले जाती हैं महानगरों में जमीन कम है उनके आसपास बसे शहरों में बिल्डर गगन चुम्बी इमारते बन रहीं है अपने अपार्टमेन्ट तक पहुंचने के लिए लिफ्ट की जरूरत पड़ती है | खेती के लिए उपजाऊ जमीन पर कंक्रीट के जंगल बन गये है बारिश के समय जल निकासी के लिए यदि बड़े नाले नहीं होंगे तो शहरों में जबर्दस्त जल भराव , सडकों पर जाम ,घर पहुंचने के लिए तैर कर जाना पड़ेगा सब कुछ सिकुड़ा लगता है सडकों के किनारे तक बाजार बन गये ठेले लगते हैं रोज रोजी रोटी की जद्दोजहद देखने में आती है देश में 35 करोड़ युवा हैं सब को रोजगार देना असम्भव है | राजनीतिक दल चुनाव के अवसर पर बड़े-बड़े वादे कर चुनाव जीतते हैं जनता के लिए कुछ करना भी चाहते हैं लेकिन सुरसा के मुहँ की तरह बढ़ती जनसंख्या के आगे हाथ खड़े कर देते हैं अपना समय काट कर चले जाते हैं इंदिरा जी की सरकार के समय आपतकालीन स्थित के दौरान जनसंख्या पर सख्ती से नियन्त्रण की कोशिश की गयी हम दो हमारे दो का नारा दिया वह बुरी तरह चुनाव हार गयी 43 वर्ष बाद भी नसबंदी के लिए उन्हें कोसा जाता है| उसके बाद किसी सरकार ने जनसंख्या नियन्त्रण की बात नहीं की भय है उनका चुनाव जीतने पर प्रश्न चिन्ह लग जाएगा|


चीन सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश है वहाँ जनसंख्या नियन्त्रण की नीति बनाई सरकार ने जनता को केवल एक बच्चे की स्वीकृति दी अपने देश में विरोध और विदेशों में निंदा की गयी चीन जनसंख्या नियन्त्रण के लक्ष्य पर डटा रहा अब उनके यहाँ जवानों की संख्या कम हो गई अब सरकार दो बच्चों की इजाजत देने की सोच रही है | जापान में जमीन कम है अत :एक बच्चे का चलन है मजबूरी थी अकेला बच्चा बिगड़ने लगा उसे उन्होंने लिटिल प्रिंस का नाम दिया कुछ लोग बच्चा पैदा करने से ही डरने लगे | ईरान इराक का युद्ध हुआ ईरान में एक मिलियन लोग मर गये और एक मिलियन के करीब अपाहिज, पहले जनता से प्रार्थना की गई वह अधिक संख्या में शहीद पैदा करें वहाँ कई गुना बच्चे पैदा हो गये इस्लामिक सरकार को जनसंख्या पर रोक लगानी पड़ी| बंगलादेश के हाल बेहाल हैं जमीन कम जनसंख्या का घनत्व अधिक वह भी रोजी रोजगार के लिए चोरी छिपे भारत आते रहते हैं यहीं के लोगों का काम छीनते हैं |


जिन राज्यों में जनसंख्या वृद्धि दर अधिक है वहां जन्म देने के चक्कर में मृत्यु दर भी बढ़ती है कमजोर बच्चे को कब तक बचाया जा सकता है । इससे जन्म, मृत्यु और बुरे स्वास्थ्य का दोषपूर्ण चक्र प्रारम्भ हो जातै है। यह समस्त विकास पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। कोई भी धार्मिक तर्क जनसंख्या वृद्धि के पक्ष में चल नहीं सकता | सूखे भूखे बिमार मतदाता को मतदान क्षेत्र तक लाना भी मुश्किल हो जायेगा |एक समय था जब परिवार नियोजन के साधनों का अभाव था मजबूरी थी यदि सन्तान ईश्वर की देन होती तो धरती भी फैलती और पैदावार उगलती ईश्वर ने अक्ल दी है अच्छी सन्तान माता पिता के लिए सुखकारी है उसकी शिक्षा दीक्षा से उनको संतोष मिलता है,गरीबी बेरोजगारी नौजवानों को अपराध की तरफ मोड़ देगी या मुस्लिम समाज के पढ़े लिखे होनहार बच्चे धर्म के नाम पर बरगलाये जा रहे हैं माता पिता की आखों में छिपे आंसू देखें है. ?आज जरूरत है मिल बैठ कर आतंकवाद की समस्या का हल ढूंडने की दूसरी तरफ उग्र राष्ट्रवाद का पाठ पढ़े नौजवान खुद भी मर जायेंगे दूसरों को भी मार देंगे या अपाहिज कर देंगें जीना मुश्किल हो जायेगा देश दुनिया जहन्नुम बन जाएगी |


छोटा परिवार सुखी परिवार महिलाओं की समझ में आसानी से आ जाता है जरूरत हैं महिलाओं की शिक्षा पर जोर देने की, शिक्षित माँ अच्छी तरह समझती है छोटा परिवार सुख का संसार होता है जनसंख्या की बढ़ोत्तरी में सरकार की भी जबाबदेही होनी चाहिए परिवार नियोजन के साधनों का प्रचार किया जाए अस्पतालों में नसबंदी की सुविधायें हो कुछ परिवार अधिक सन्तान नहीं चाहते लेकिन अनभिज्ञता के कारण अनचाहे बच्चे पैदा हो जाते हैं मीडिया का भी रोल है वह ऐसे विज्ञापन दे , समझाये भीड़ कभी जनहित कारी नहीं हो सकती केवल सस्ती लेबर ही मिल सकता है लेकिन देश में या विदेश में हड्डियों के ढांचों से कोई मजदूरी भी नही कराएगा | भारत की जनसंख्या अनियमित रूप से इतनी बढ़ चुकी है जिससे हर और भीड़ ही भीड़ दिकाई देती है रोजी रोटी की खोज में राज्यों से रोज बहुत बड़ी जनसंख्या में लोग दिल्ली आते हैं दिल्ली में बढ़ती जनसंख्या को सम्भालना मुश्किल है छोटे से एक कमरे में पूरा परिवार रहता है | एक कमरे में दस-दस लड़के तक रहते हैं सुबह जब लोग अपने आफिस या काम पर जाते है पूरा जन समूह नजर आता हैं बम्बई का तो और भी बुरा हाल है |


सरकारें निवेश की चिंता से परेशान रहते हैं निवेश आयेगा तब जाकर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे | टेक्नोलोजी का जमाना है जितनी विकसित टेक्नोलोजी देश के पास होगी उतना ही समर्थ शाली देश बनेगा | देश के जवानों ने बड़ी संख्या में विदेश जा कर अपनी प्रतिभा के बल पर सम्मानित स्थान बनाया वह बड़े-बड़े पदों पर कार्य कर रहे है | कम्प्यूटर का क्षेत्र हो या वैज्ञानिक खोज देश में विदेशी मुद्रा का भंडार बढ़ा है |अस्पतालों में दूसरे देशों से असाध्य रोगों का निदान करवाने रोगी आ रहें हैं उनके सफल आपरेशन हो रहे हैं| सरकारे शिक्षा का स्तर बढ़ायें नौजवान हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो लेकिन जनसंख्या का बोझ इतना बढ़ गया हैं जवानों में असंतोष ,हताशा और कुंठा बढ़ती जा रही है आत्महत्या की घटनाओं में भी बढ़ोत्तरी हो रही हैं | अत : सोचें आपको जनता ने संसद में अपनी समस्याओं के हल के लिए भेजा था न कि आत्म प्रचार के लिए |भूख आदमी से क्या नहीं करवा देती ? सबसे पहले विवेक हर लेती है|

बंगला देश में ईद के अवसर पर ईद मनाने घर जाते लोगों की तस्वीर

अगला लेख: दिल्ली सरकार एवं एलजी का विवाद क्या खत्म होगा ?


शोभा भारद्वाज

लिखना मेरा शोक है में 30 वर्षों से आकाश वाणी से जुडी हुई हूँ आज का विचार, और वार्ता मे भाग लेती हूँ  लेख भेजती हूँऔर  विचार रखती हूँ पांचवा स्तम्भ , सूर्या संस्थान द्वारा छपने वाली मैगजीन में मेरे लेख प्रकाशित होते हैं वर्तमान अंकुर अखबार में नितन्तर मेरे लेख छपते हैं जागरण जंगशन और नवभारत टाईम्स ब्लॉग में निरंतर लिखती हूँ अंतर्राष्ट्रीय विषयों  और कूटनीति के विषयों में मेरी विशेष रूचि है वैसे राजनीती और किसी महान पुरुष के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालना मेरा प्रमुख उद्देश्य है मैने 10 वर्ष ईरान  में उस समय परिवार सहित बिठाये हैं जब ईरान का शाह देश छोड़ कर  जा चुके थे इस्लामिक सरकार ने किस तरह ईरान की जनता पर नियन्त्रण किया तथा ईरान इराक युद्ध देखा मैंने भारत पाकिस्तान सम्बन्धों पर पर रिसर्च की है विषय Anglo American Impact on the Indo Pak Relations और कुछ ख़ास नहीं, मुख्य शौक लेक्चर देना है ,लिखना मेरा शोक है में 30 वर्षों से आकाश वाणी से जुडी हुई हूँ आज का विचार, और वार्ता मे भाग लेती हूँ  लेख भेजती हूँऔर  विचार रखती हूँ पांचवा स्तम्भ , सूर्या संस्थान द्वारा छपने वाली मैगजीन में मेरे लेख प्रकाशित होते हैं वर्तमान अंकुर अखबार में नितन्तर मेरे लेख छपते हैं जागरण जंगशन और नवभारत टाईम्स ब्लॉग में निरंतर लिखती हूँ अंतर्राष्ट्रीय विषयों  और कूटनीति के विषयों में मेरी विशेष रूचि है वैसे राजनीती और किसी महान पुरुष के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालना मेरा प्रमुख उद्देश्य है मैने 10 वर्ष ईरान  में उस समय परिवार सहित बिठाये हैं जब ईरान का शाह देश छोड़ कर  जा चुके थे इस्लामिक सरकार ने किस तरह ईरान की जनता पर नियन्त्रण किया तथा ईरान इराक युद्ध देखा मैंने भारत पाकिस्तान सम्बन्धों पर पर रिसर्च की है विषय Anglo American Impact on the Indo Pak Relations और कुछ ख़ास नहीं, मुख्य शौक लेक्चर देना है ,लिखना मेरा शोक है में 30 वर्षों से आकाश वाणी एवं  टीवी  चैनलों  से  से जुडी हुई हूँ आज का विचार, और वार्ता मे भाग लेती हूँ  लेख भेजती हूँ और  विचार रखती हूँ पांचवा स्तम्भ , सूर्या संस्थान द्वारा छपने वाली मैगजीन में मेरे लेख प्रकाशित होते हैं वर्तमान अंकुर अखबार में नितन्तर मेरे लेख छपते हैं में  वरिष्ठ  स्तम्भकार  हूँ  जागरण जंगशन और नवभारत टाईम्स ब्लॉग में निरंतर लिखती हूँ अंतर्राष्ट्रीय विषयों  और कूटनीति के विषयों में मेरी विशेष रूचि है वैसे राजनीती और किसी महान पुरुष के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालना मेरा प्रमुख उद्देश्य है मैने 10 वर्ष ईरान  में उस समय परिवार सहित बिठाये हैं जब ईरान का शाह देश छोड़ कर  जा चुके थे इस्लामिक सरकार ने किस तरह ईरान की जनता पर नियन्त्रण किया तथा ईरान इराक युद्ध देखा मैंने भारत पाकिस्तान सम्बन्धों पर पर रिसर्च की है विषय Anglo American Impact on the Indo Pak Relations और कुछ ख़ास नहीं, मुख्य शौक लेक्चर देना है ,लिखना मेरा शोक है में 30 वर्षों से आकाश वाणी एवं  टीवी  चैनलों  से  से जुडी हुई हूँ आज का विचार, और वार्ता मे भाग लेती हूँ  लेख भेजती हूँ और  विचार रखती हूँ पांचवा स्तम्भ , सूर्या संस्थान द्वारा छपने वाली मैगजीन में मेरे लेख प्रकाशित होते हैं वर्तमान अंकुर अखबार में नितन्तर मेरे लेख छपते हैं में  वरिष्ठ  स्तम्भकार  हूँ  जागरण जंगशन और नवभारत टाईम्स ब्लॉग में निरंतर लिखती हूँ अंतर्राष्ट्रीय विषयों  और कूटनीति के विषयों में मेरी विशेष रूचि है वैसे राजनीती और किसी महान पुरुष के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालना मेरा प्रमुख उद्देश्य है मैने 10 वर्ष ईरान  में उस समय परिवार सहित बिठाये हैं जब ईरान का शाह देश छोड़ कर  जा चुके थे इस्लामिक सरकार ने किस तरह ईरान की जनता पर नियन्त्रण किया तथा ईरान इराक युद्ध देखा मैंने भारत पाकिस्तान सम्बन्धों पर पर रिसर्च की है विषय Anglo American Impact on the Indo Pak Relations और कुछ ख़ास नहीं, मुख्य शौक लेक्चर देना है 

मित्रगण 53       वेबपेज  0       लेख 122
सार्वजनिक वेबपेज
अनुयायी 95
लेख 26813
लेखक 1
शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
13 जुलाई 2018
1962... कोई भी भारतीय चाहकर भी ये साल और इससे जुड़ी घटना नहीं भूल सकता.1962 यानी कि युद्ध. भारत-चीन युद्ध, जिसे Sino-Indian War भी कहा जाता है. वो युद्ध जो टल सकता था, अगर रक्षा मंत्री वी.के.मेनन लेफ्टिनेंट जनरल थोराट की युद्ध होने की आशंका वाली बात को नज़रअंदाज़ न करते.
13 जुलाई 2018
07 जुलाई 2018
टे
सुर्ख अंगारे से चटक सिंदूरी रंग का होते हुए भी मेरे मन में एक टीस हैं.पर्ण विहीन ढूढ़ वृक्षों पर मखमली फूल खिले स्वर्णिम आभा से, मैं इठलाया,पर न मुझ पर भौरे मंडराये और न तितली.आकर्षक होने पर भी न गुलाब से खिलकर उपवन को शोभायमान किया.मुझे न तो गुलदस्ते में सजाया गया और न ही माला में गूँथकर द
07 जुलाई 2018
29 जून 2018
धर्म गुरु श्री राज कृष्ण शर्मा जी +91 9216111690गुरु जी प्रतिदिन सुबह 7:15 बजे You Tube Channel, INC MEDIA ASSOCIATES ( https://www.youtube.com/channel/UCyAq... ) पर लाइव रहेंगेनमस्कार दर्शकों, आज के इस वीडियो में बता
29 जून 2018

शब्दनगरी से जुड़िये आज ही

आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
अंग्रेजी  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x