ममृत्युलोक का सच ---- आचार्य अर्जुन तिवारी

10 जुलाई 2018   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (19 बार पढ़ा जा चुका है)

ममृत्युलोक का सच ---- आचार्य अर्जुन तिवारी - शब्द (shabd.in)

!! भगवत्कृपा हि केवलम् !! *यह संसार परिवर्तनशील है ! यहाँ कभी भी कुछ भी एक जैसा न रहा है और न ही रहेगा | नित्यप्रति परिवर्तन ही सृष्टि का नियम है | जिस प्रकार प्रात:काल सूर्योदय होता है और दिनभर सारे संसार को प्रकाशित करने के बाद वह पुन: समयनुकूल अपने पीछे एक गहन अन्धकार अस्ताचल में चला जाता है , उसी प्रकार इस संसार के प्रत्येक जड़ - चेतन एक निश्चित अवधि लेकर इस संसार में आये हैं , समय पूर्ण होने पर उनका जाना निश्चित है | यहाँ कोई भी रह नहीं पाया है | इतिहास / पुराणों पर दृष्टि डाली जाय तो एक से एक महान दैत्य हुए जिन्होंने किसी न किसी प्रकार से अमरता का वरदान भी प्राप्त किया परंतु क्या वे अमर हो सके ?? उन्हें भी किसी न किसी कारणवश इस संसार से जाना पड़ा | जहाँ हम निवास कर रहे हैं उसे मृत्युलोक कहा जाता है जिसका सीधा सा अर्थ है :- "मौत का घर" ! इस मृत्युलोक में जो भी आया वह काल से बच नहीं पाया है | मरना सबको एक दिन है , यह बात जो समझ गया उसका जीवन आज सार्थक होकर अमर हो गया और जो स्वयं को ही श्रेष्ठ मानता रहा वह अपना जीवन एवं जीवन का उद्देश्य नष्ट करके पतित होकर चला जाता है | ऐसे लोग जीवन भर तो उपेक्षित रहते ही हैं और मृ्त्योपरांत भी सम्मान नहीं पाते | यह संसार एवं इसका नियम इतना सुदृढ है कि इसके नियमों से कोई भी बच नहीं पाया है | समय समय पर भगवान ने या अन्य देवी - देवताओं ने भी अपने अंश सहित इस धरा पर अवतरित हुए वे चाहते तो अमर ही रहते परंतु सृषेटि के नियम के अन्तर्गत उन्हें भी एक निश्चित अवधि यहाँ व्यतीत करके इस मृत्युलोक को छोड़कर जाना ही पड़ा है | यहाँ कोई भी स्थिर नहीं रह पाया है | स्थिर है तो मात्र उनके कर्मों की व्याख्या |* *आज चारों ओर त्राहि त्राहि मची हुई है | आज का मनुष्य "एको$हं द्वितीयो नास्ति" की भावना से ओतप्रोत दिख रहा है | अधिकतर लोग ऐसे कर्म कर रहे हैं जैसे कि उन्हें इसी संसार में ही रहना है | मनुष्य का चित्त चंचल तो होता ही है , इसी चंचलता के चलते आज मनुष्य का चित्त उसके वश में नहीं रह गया है ऐसा उसके कृत्यों से लगता है | आज स्थिरभाव की कमी झलक रही है | मनुष्य काम , क्रोध , मद , लोभादि से इस तरह ग्रसित हो गया है कि क्या करना चाहिए और क्या त्याज्य है इसका आंकलन वह समय रहते स्वयं करने में अक्षम हो रहा है | ऐसा नहीं है कि ये काम क्रोध मद लोभ पहले नहीं थे ! ये सदा से थे और रहेंगे , परंतु इसी धरा धाम पर इन पर विजय प्राप्त करने वाले भी हुए हैं | आज हम यह जानते हैं कि यह जीवन स्थायी नहीं है एक न एक दिन जाना ही है परंतु फिर भी हम प्रेम का वितरण किन्हीं कारणों से नहीं कर पा रहे हैं | एक एक क्षण मनुष्य की अक निश्चित आयु का क्षरण हो रहा है , इसको हमें ध्यान देना होगा | परंतु हम इसे जानकर भी मानना नहीं चाहते | मैं "आचार्य अर्जुन तिवारी" यह कहना चाहता हूँ कि जिस दिन मनुष्य यह मान लेता है कि यह मानव शरीर एक किराये की कोठरी है और किराया पूरा हो जाने मकानमालिक द्वारा यह कोठरी रूपी मानव शरीर वापस ले लिया जायेगा , उसी दिन से मानव की दिशा एवं दशा परिवर्तित हो जाती है और वह ऐसे कार्यों में स्वयं को लिप्त करने का प्रयास करने लगता है कि उसके कारण किसी को कोई कष्ट न हो |* *हम सभी को यह मानकर चलना चाहिए कि यह जीवन क्षणभंगुर है ! इस अनमोल जीवन का मूल्य समझना ही होगा ! तभी यह जीवम सार्थक हो सकता है |*

अगला लेख: स्वयं की खोज ----- आचार्य अर्जुन तिवारी


शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
30 जून 2018
!! भगवत्कृपा हि केवलम् !! पारब्रह्म परमेश्वर ने इस सुंदर सृष्टि की रचना की , मैथुनी सृष्टि करके मनुष्य को इस धराधाम पर उतारा | मनुष्य ईश्वर के प्रति कृतज्ञ होकर उसकी आराधना करने का वचन देता है | पुराण बताते है कि माँ के गर्भ में बालक की स्थिति उत्तानपाद होती है ! अर्थात सर नीचे तथा पैर ऊपर को ह
30 जून 2018
30 जून 2018
!! भगवत्कृपा हि केवलम् !! सनातन काल से भारत की संस्कृति संपूर्ण विश्व के लिए मार्गदर्शक की भूमिका निभाती आई है | भारत देश में माता पिता और गुरु का स्थान मानव जीवन में बहुत ही महत्वपूर्ण होता है | माता पिता के बिना जहां जीवन मिलना संभव नहीं है , वहीं गुरु के बिना जीवन के विषय में जानना या कोई भी
30 जून 2018
14 जुलाई 2018
!! भगवत्कृपा हि केवलम् !! *हमारे मनीषियों ने मनुष्य के षडरिपुओं का वर्णन किया है | जिसमें से एक अहंकार भी है | अहंकार मनुष्य के विनाश का कारण बनता देखा गया है | इतिहास गवाह है कि अहंकारी चाहे जितने विशाल साम्राज्य का अधिपति रहा हो , चाहे वह वेद - वेदान्तों में पारंगत कियों न रहा हो उसका विनाश अ
14 जुलाई 2018
30 जून 2018
!! भगवत्कृपा हि केवलम् !! हमारे ऋषियों - महर्षियों/महापुरुषों ने प्रारम्भ से अध्यात्म का मार्ग चुना एवं सभी को आध्यात्मिक बनाने का प्रयास करते रहे | प्रत्येक व्यक्ति आध्यात्मिक बनना भी चाहता है | आध्यात्मिक बनने के लिए सर्वप्रथम आवश्यकता यह जानने की है कि आखिर "अध्यात्म" है क्या ?? अध्य + आत्म
30 जून 2018
30 जून 2018
!! भगवत्कृपा हि केवलम् !! इस धराधाम पर विधाता ने अद्भुत मैथुनी सृष्टि की है | नर एवं नारी का जोड़ा उत्पन्न करके दोनों को एक दूसरे का पूरक बनाया | बिना एक दूसरे के सहयोग के सृष्टि का सम्पादन नहीं हो सकता | नर एवं नारी की महत्ता को दर्शाते हुए भगवान शिव ने भी अर्द्धनारीशवर का स्वरूप धारण किया है
30 जून 2018
05 जुलाई 2018
!! भगवत्कृपा हि केवलम् !!*मनुष्य के जीवन में यदि देखा जाय तो संसार में सब कुछ महत्त्वपूर्ण है ! परंतु इन सभी सबसे अति महत्तवपूर्ण शिक्षा | बिना शिक्षा प्राप्त किये मनुष्य को स्वयं , समाज एवं विशेषकर मनुष्यता का बोध नहीं हो सकता | एक शिक्षित मनुष्य ही अपने भले बुरे के बारे में सही ढंग से सोच सकता
05 जुलाई 2018
30 जून 2018
!! भगवत्कृपा हि केवलम् !! इस असार संसार में आने के बाद मनुष्य जैसे खो जाता और उसकी एक यात्रा प्रारम्भ हो जाती है | मनुष्य द्वारा नित्यप्रति कुछ न कुछ खोजने की प्रक्रिया शुरू होती है | मनुष्य का सम्पूर्ण जीवनकाल एक खोज में ही व्यतीत हो जाता है | कभी वह वैज्ञानिक बनकर नये - नये प्रयोगों की खोज कर
30 जून 2018

शब्दनगरी से जुड़िये आज ही

आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
अंग्रेजी  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x