ज़िन्दगी

10 जुलाई 2018   |  Zafar Anwar   (21 बार पढ़ा जा चुका है)

यह ज़िन्दगी जो भँवर जाल है ,

यह ज़िन्दगी ही मृत्यु काल है।

समय रथ पर जो तू है सवार ,

यह सारी समय की ही चाल है।


घिरी अन्धकार में तेरी वीरता ,

तेरी निष्ठा ही एक मशाल है ।


वो अनजानी सी राह पर निकले ,

सारी दुनिया का बस यही हाल है ।


लकीरों वाली तेरी किस्मत ,

तेरे कर्मों का ही परिणाम है ।


उम्मीद सुखी रूखी सी ही सही ,

तेरे सपनों का बस वही ढाल है ।

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