एहसास

11 जुलाई 2018   |  राधिका चतुर्वेदी   (344 बार पढ़ा जा चुका है)

एहसास

हर इंसान की ज़िन्दगी में एहसास का मतलब बहुत की महत्वपुर्ण होता है क्यूंकि एहसास किसी भी तरीके का हो हर एक ही ज़िन्दगी में होता ज़रूर है बस उसके रूप फरक होते है. कोई अपने रिश्तो के एहसास से खुश है तो कोई अपनी सफलता से. आज यहाँ भी हम बात करेंगे कुछ ऐसे एहसास की जो एक औरत के लिए सबसे खूबसूरत एहसास होते है वो एहसास जो एक औरत अपने अंदर बहुत ही खूबसूरती से लगभग 9 महीने तक रखती है. और दूसरा एहसास एक माँ बनने का एहसास जिसको सिर्फ एक औरत ही जान सकती है. यु तो एक औरत का माँ बनना उसके जीवन के सबसे खूबसूरत पल्लो का हिस्सा होता है पर इस समय के एहसास से बड़ा उसके जीवन में कुछ नहीं होता जहा एक धुंधला सा चेहरा जो आँखों के सामने घूमता रहता है. कुछ नन्ने कदमो की आवाज़े कांनो में आती है. सोते हुए कोई धीरे से उठता है और बोलता है माँ अब उठ जाओ देखो मैं उठी हुई हु तो आप क्यों सो रही हो मुझसे बातें करो मुझे सबके बारें में बताओ दुनिया कैसी है समझाओ, हर दिन पूछना की माँ मैं आपको अंदर रहकर कोई दिक्कत तो नहीं दे रही, माँ चलो न कही घूमने चलते है मन कर रहा है, माँ कुछ अच्छा खिलाओ, माँ मेरे नाखून और बाल आपको चुब्तें होंगे ना, माँ आज पहेली बार मैंने आँखे खोली, माँ वहा की दुनिया कैसी है बताओ यहाँ तो सब घूम रहा है, माँ आज मैंने करवट ली थी आपको पता चला ना बड़ा अच्छा लगा. दरहसल ये एहसास एक माँ का ही होता है जो अपने बच्चे को अपनी सोच में रखकर अंदर से निकलता है. अब जब वो चेहरा सामने आता है तो ऐसा लगता है मानो जैसे कह रहा हो की माँ तू जितनी बाहर से खूबसूरत है वो ही सादगी तेरे अंदर भी है मैंने देखी है और महसूस भी की है. वो मासूम है कुछ नहीं जानता लेकिन हम फिर भी घंटो बैठकर उससे बातें किया करते है उसके सामने रो लेते है और हस भी लेते है. उसे सारी पुरानी बातें बताते है नए रिश्तो से मिलवाते है उसकी एक अचानक से हसी के लिए हम पागल रहते है. दुनिया उसे शुरुवात में अलग अलग नामो से बुलाती है और जहा चले जाएँ उस जगह रौनक सी समां जाती है. ये बच्चे होते ही ऐसे है जिनसे कभी कोई रूठ नहीं सकता जो जीवन में आकर ज़िन्दगी बन जातें है. समय कब भाग जाता है पता ही नहीं चलता. ऐसा लगता है की अभी तो हम अपना बचपन याद कर रहे थे और आज हम अपने बच्चे के बचपन को सुन्दर बनाने में लगे है. बच्चे की एक छोटी सी हसी मानो कहे रही हो माँ मैं रात में नहीं सोती जानती हो क्यों क्यूँकि रात में सनाटा होता है और मैं बोल नहीं पाती पर मैं चाहती हु की आप रात की शांति में मेरे अंदर की बातो को जानो और मुझसे ढेर सारी बातें करो और मैं आपको जानू. और इसके लिए मैंने रात इसलिए चुनी क्यूँकि दिन में तो आप बहुत सारे लोगो के बीच घिरी हुए होती हो इसलिए रात में मैं जागती हु जैसे मेरी माँ अपना पूरा समय मुझे दे सके और मुझसे खुभ सारी बातें किया करें. ये जितनी भी बातो का यहाँ वर्णन हुआ ये सिर्फ एक माँ ही समझ सकती है. मैंने सारे एहसांसो में से एक माँ का एहसाँस ही इसलिए चुना क्यूँकि इससे बड़ा और कुछ नहीं होता. पर तकलीफ होती है जब लोग इस प्यारे से एहसास को जीना ही नहीं चाहते और अपने अंदर से हटवा देते है अगर उन्हें पता चल जाए की इस एहसास का नाम नारी है. ये कैसी सोच वाले लोग होते है जो इतने प्यारे से एहसास को सिर्फ एक लिंग के चक्कर में गिरवा देते है. काश हम चंद उन लोगो की इस सोच को बदल सकते और उन्हें इस प्यारे से एहसास के बारें में बता सकते. एहसास हर इंसान में होते है बस किसी में अच्छे होते है तो किसी में बुरे. ऐसे ही अगर अच्छे इंसान को हर कोई समझ पाता तो ये देश आज उचाइयो की बुलंदियों पर होता और हर रिश्ता हर नारी और हर इंसान इस देश का मेहफूस होता.

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