तीज उत्सव 2018

12 जुलाई 2018   |  Pratibha Bissht   (324 बार पढ़ा जा चुका है)

सावन का महीना शुरू होने वाला है| सावन का मौसम एक अजीब सा उत्साह ओर उमंग लेकर आता है। चारों ओर हरियाली ही हरियाली दिखाई देती है और उसे देख कर सबका मन झूम उठता है। ऐसे ही सावन के सुहावने मौसम में आता है तीज का त्यौहार। श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को श्रावणी तीज कहते हैं। उत्तर भारत में यह हरियाली तीज के नाम से भी जानी जाती है। यह त्यौहार मुख्यत: स्त्रियों का त्यौहार माना जाता है|

सावन का महीना आते ही त्योहारों का सिलसिला शुरू हो जाता है| सावन के महीने में तीज, नागपंचमी एवं सावन के सोमवार जैसे उत्सव उत्साह पूर्वक मनाए जाते है|

तीज का त्यौहार भारत के कोने-कोने में मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण त्यौहार है. यह त्यौहार भारत के उत्तरी क्षेत्र में हर्षो उल्लास के साथ मनाया जाता है| तीज भारत के अनेक भागों में मनाई जाती है लेकिन राजस्थान की राजधानी जयपुर में इसका विशेष महत्त्व है।

सावन की तीज में महिलाएं व्रत रखती हैं इस व्रत को अविवाहित कन्याएं योग्य वर को पाने के लिए करती हैं तथा विवाहित महिलाएं अपने सुखी दांपत्य की चाहत के लिए करती हैं| देश के पूर्व के इलाकों में लोग इसे हरियाली तीज के नाम से भी जानते हैं|



तीज पर मेहंदी लगाने और झूले झूलने का विशेष महत्त्व माना जाता है| तीज पर नव युवतियाँ हाथों में मेंहदी रचाती हैं तथा लोक गीतों को गाते हुए झूले झूलती हैं| तीज के दिन खुले स्थान पर बड़े– –बड़े वृक्षों की शाखाओं पर, घर की छत की कड़ों या बरामदे में कड़ों में झूले लगाए जाते हैं और जिन पर स्त्रियां झूला झूलती हैं | हरियाली तीज के दिन अनेक स्थानों पर मेले भी लगते हैं|

सावन माह में मनाया जाने वाला यह हरियाली पर्व दंपतियों के वैवाहिक जीवन में सम्पन्ता , खुशी और तरक्की का प्रतीक है। एक तरह से हरियाली तीज का पर्व प्रकृति का त्योहार है और इस त्यौहार पर महिलाएं अच्छी फसल के लिए भी प्रार्थना करती हैं।

सावन की तीज का पौराणिक महत्व भी रहा है| कहा जाता है की इस दिन माता पार्वती सैकड़ों साल की साधना के बाद भगवान शिव से मिली थीं| यह भी कहा जाता है कि माता पार्वती भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए 107 बार जन्म लिया था और फिर भी माता पार्वती को पति के रूप में शिव नहीं मिले थे|


माता पार्वती ने 108 वीं बार जब जन्म लिया और उन्होंने हरिद्वार के मनसा देवी मंदिर में घोर तपस्या की थी| ऐसा कहा जाता है की माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए इस व्रत को रखा था और उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव जी ने उन्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया था |पुराणों के अनुसार श्रावण शुक्ल पक्ष की तृतीया के दिन देवी पार्वती ने सौ वर्षों की तपस्या के पश्चात भगवान शिव को पति रूप में पाया था| इसी मान्यता के अनुसार स्त्रियां माँ पार्वती का पूजन करती हैं|

इस बार तीज का त्यौहार 13 अगस्त (सोमवार ) को मनाया जायेगा और हरतालिका तीज 12 सितम्बर (बुधवार) को है|

हरतालिका तीज और काजरी तीज हैं। हरियाली तीज को छोटी तीज के नाम से भी जाना जो की सावन में मनाई जाती है| इसके बाद कजली तीज मनाई जाती है जिसे "बड़ी तीज" भी कहते है |कजली तीज, हरियाली तीज के 15 दिन बाद मनाई जाती है| इसके बाद तीसरे प्रकार की तीज मनाई जाती है जो की हरितालिका तीज है जो की हिन्दू कैलेंडर के मुताबिक भादों के महीने में मनाई जाती है और यह लगभग हरियाली तीज के एक महीने बाद मनाई जाती है|

तीज तीन प्रकार की होती है| हरियाली तीज में महिलाएं चंद्रमा की पूजा करती हैं ,कजली तीज में महिलाएं नीम के पेड़ की पूजा करती हैं और सबसे महत्वपूर्ण हरितालिका तीज में महिलाये अपने पति की लंबी उम्र के लिए उपवास करते हैं।

हरियाली तीज: हरियाली तीज मुख्य रूप से राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, हरियाणा ,पंजाब और बिहार के कुछ हिस्सों में सावन के महीने में मनाई जाती है|हरियाली तेज के दौरान लोकगीत गये जाते है और नृत्य किया जाता है| वृन्दावन में हरियाली तीज पर कृष्ण जी और राधा को सजाया जाता है और फिर उनको सुनहरे झूले में बिठाया जाता है जिसे देखने के लिए विश्व भर से लोग वृन्दावन आते है| महिलाएं देवी पार्वती की पूजा करती हैं और पूजा के बाद वे लोक गीत गाती हैं। कई जगहों पर मेले आदि कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाता है|

कजली तीज : कजली तीज जिसे "बड़ी तीज" भी कहते है |कजली तीज हिंदू महीने भाद्रपदा में कृष्णा पक्ष (अंधेर पहरे ) के तीसरे दिन मनाई जाती है। कजली तीज का नाम बादलों के काले रंग की वजह से काजरी पड़ा है क्यों की काले बादल बारिश की शुरुआत का संकेत देते है| कजली तीज मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और विशेष रूप से मिर्जापुर और वाराणसी में मनाई जाती है|

हरितालिका तीज : हरतालिका दो शब्दों से बना है| हरित और तालिका, हरित का अर्थ होता है हरण करना और तालिका का अर्थ होता है सखी | यह पर्व भाद्रपद की शुक्ल तृतीया को मनाया जाता है| जिस कारण इसे तीज कहते है| इस व्रत को हरितालिका इसलिए कहा जाता है क्योकि पार्वती माता की सखी (मित्र) उन्हें उनके पिता ( हिमालय राज) के घर से हरण कर जंगल में ले गई थी| यह त्यौहार भद्र पद महीने के पहले पखवाड़े में मनाया जाता है। मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड, राजस्थान और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में मनाया जाता है।

महिलाएं इस दिन व्रत करती हैं। पानी भी नहीं पीतीं। दुल्हन की तरह सजती हैं। खूबसूरत हरे कपड़े और जेवर पहनती हैं। मेहंदी लगवाती हैं। इस त्योहार में हरी चूड़ियां, हरा वस्त्र और मेंहदी का विशेष महत्व होता है। हरा रंग ही इस दिन का पारंपरिक रंग है। महिलाएं हरी चूड़ियां अपने हाथों में पहनती हैं। विवाहित महिलाओं को उनके ससुराल की ओर से कपड़े, जेवर ,सौंदर्य प्रसाधन और मिठाइयां, उपहार के तौर पर देने की परंपरा है। नवविवाहित महिलाएं अपनी पहली हरियाली तीज अपने मायके जाकर मनाती हैं।

झूला इस त्योहार का अभिन्न अंग है। इसी वजह से पेड़ों पर झूले डाले जाते हैं। साथ ही मानसून के दौरान भी झूला झूलने का अपना ही एक मजा है।

महिलाएं को निर्जला व्रत रहना पड़ता है। इस व्रत में पूजन रात भर किया जाता है। इस पूजन में भगवान शंकर और माता पार्वती की मूर्ति बनाकर एक चौकी पर शुद्ध मिट्टी में गंगाजल मिलाकर बनाई जाती है। रिद्धि-सिद्धि सहित गणेश जी की मूर्ति भी बनाई जाती है। इसके बाद पूजन किया जाता है। पूजा -पाठ के बाद महिलाएं रात भर भजन-कीर्तन करती हैं।

अगले दिन ये व्रत खुलता है और महिलाएं अन्न ग्रहण करती हैं। शिव परिवार की कच्ची मूर्ति बनाकर उसका विसर्जन करके ही व्रत पूरा होता है।

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