तुम्हारा जाना

13 जुलाई 2018   |  रितिका दीक्षित गौतम   (134 बार पढ़ा जा चुका है)

चले गए हो तुम यूँ अचानक

और ले गए हो साथ अपने

सारी खुशियाँ सारा उत्साह और जीने की चाह | सब कुछ |

जिंदगी चल तो रही है तुम बिन

पर क्या सच में जिन्दा हैं हम

पापा खामोश हैं और मम्मी भी चुप हैं

होंठ तो फिर भी बोल पड़ते हैं

पर आँखों में सबकी मौन है

चले गए हो तुम यूँ अचानक

सारे सपने और उम्मींदे तोड़कर

और तोड़ गए हो साहस

नए सपने देख पाने का

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