“मुक्तक” हर पन्ने लिख गए वसीयत जो।

13 जुलाई 2018   |  महातम मिश्रा   (70 बार पढ़ा जा चुका है)

मापनी- २१२ २१२ १२२२


“मुक्तक”


हर पन्ने लिख गए वसीयत जो।

पढ़ उसे फिर बता हकीकत जो।

देख स्याही कलम भरी है क्या-

क्या लिखे रख गए जरूरत जो॥-१


गाँव अपना दुराव अपनों से।

छाँव खोकर लगाव सपनों से।

किस कदर छा रही बिरानी अब-

तंग गलियाँ रसाव नपनों से॥-२


महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी

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