मृगतृष्णा का जाल बनता गया.........

14 जुलाई 2018   |  गौरीगन गुप्ता   (122 बार पढ़ा जा चुका है)

भावनाओं का चक्रव्यूह तोड़

स्मृतियों के मकड़जाल से निकल

कच्ची छोड़,पक्की डगर पकड़

लालसाओं के खुवाओं से घिरा

भ्रमित मन का रचित संसार लिए.....

रेगिस्तान में कड़ी धूप की

जलधारा की भांति सपनें पूरे करने......

चल पड़ा एक ऐसी डगर.......

अनजानी राहें,नए- लोग

चकाचौंध की मायावी दुनियां

ऊँची-ऊँची इमारतों जैसे ख्वाब

हकीकत को बदलनें,सड़कें नापता रहा

बनना चाहता,मैं जिंदगी में कुछ

घिसे-पिटे जीवन को संबारने की उम्मीद को

लुभावनी लगी मन को,सिलसिला शुरू हुआ

और अच्छा ,और अच्छा की चाहत बढ़ती गई

ओहदे पर ओहदे बदलें

अपनी ही छाया को पकड़ने लगा....

छलावी दुनियां में छलता गया.....

माना,अपार भौतिक सम्पदा बनाम मानसिक सुख

सम्पन्नता तो मिली पर संतुष्टि नही......

और मृगतृष्णा की भीड़ में खो सा गया.......

अगला लेख: वो क्यों नहीं आई !



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
12 जुलाई 2018
टे
मुंह अँधेरे ही भजन की जगह,फोन की घंटी घनघना उठी,घंटी सुन फुर्ती आ गई,नही तो,उठाने वाले की शामत आ गई,ड्राईंग रूम की शोभा बढाने वाला,कचड़े का सामान बन गया,जरूरत अगर हैं इसकी,तो बदले में कार्डलेस रख गया,उठते ही चार्जिंग पर लगाते,तत्पश्चात मात-पिता को पानी पिलाते,दैनान्दनी से निवृत हो,पहले मैसेज पढ़ते,बा
12 जुलाई 2018
10 जुलाई 2018
हँसमुखी चेहरे पर ये कोलगेट की मुस्कान,बिखरी रहे ये हँसी,दमकता रहे हमेशा चेहरा,दामन तेरा खुशियों से भरा रहे,सपनों की दुनियां आबाद बनी रहे,हँसती हुई आँखें कभी नम न पड़े,कालजयी जमाना कभी आँख मिचौली न खेले,छलाबी दुनियां से ठग मत जाना,खुशियों की यादों के सहारे,दुखों को पार लगा लेना,कभी ऐसा भी पल आये जीवन
10 जुलाई 2018
06 जुलाई 2018
बच्चे के जन्म के बाद भारतीय परिवारों में बच्चे की माँ को बच्चे के जन्म के बाद हरीरा दिया जाता है हरीरा में शामिल सभी तत्व जच्चा के लिए अत्यंत लाभदायक है आइये जानते है कि सबसे पहले आपको क्या सामग्री लेनी है आप आसानी से इसे घर
06 जुलाई 2018
06 जुलाई 2018
जी
व्यक्ति क्या चाहता है, सिर्फ दो पल की खुशी और दफन होने के लिए दो गज जमीन, बस... इसी के सहारे सारी जिन्दगी कट जाती है। तमन्नाएं तो बहुत होती है, पर इंसान को जीने के लिए कुछ चन्द शुभ चिन्तक की, उनकी दुआओं की जरूरत होती है।आज सभी के पास सब कुछ है मग
06 जुलाई 2018
15 जुलाई 2018
जीवन पानी का बुलबुला, पानी के मोल मत समझो, जीवन का हैं दूसरा नाम , प्रकृति का अमूल्य उपहार, जीवनदायिनी तरल, पानी की तरह मत बहाओ, पूज्यनीय हमारे हुए अनुभवी, घाट- घाट का पानी पीकर, जिन्हें हम, पिन्डा पानी देते, तलवे धो- धोकर हम पीते, ×---×----×-----×---×--× सामाजिक प्राणी है, जल में रहकर, मगर
15 जुलाई 2018
30 जून 2018
रि
बदलते समीकरण - रिश्तों के...आज ख़ुशी का दिन था,नाश्ते में ममता ने अपने बेटे दीपक के मनपसन्द आलू बड़े वाउल में से निकालकर दीपक की प्लेट में डालने को हुई तो बीच में ही रोककर दीपक कहने लगा-माँ,आज इच्छा नही हैं ये खाने की.और अपनी पत्नी के लाये सेंडविच प्लेट में रख खाने लगा. इस तरह मना करना ममता के मन को
30 जून 2018
02 जुलाई 2018
महोदय,नमस्कार! पुरुस्कृत रचना से प्राप्त राशि का विवरण कहा पर देखने को मिल सकता हैं? कृपया अवगत कराए.सधन्यवाद!
02 जुलाई 2018
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x