“गीतिका”हर मौसम के सुबह शाम से इक मुलाक़ात रही है

17 जुलाई 2018   |  महातम मिश्रा   (103 बार पढ़ा जा चुका है)

समांत- अही पदांत- है मात्रा भार-२९ १६ १३ पर यति


“गीतिका”


हर मौसम के सुबह शाम से इक मुलाक़ात रही है

सूरज अपनी चाल चले तो दिन और रात सही है

भोर कभी जल्दी आ जाती तब शाम शहर सजाती

रात कभी दिल दुखा बहकती वक्त की बात यही है॥


हरियाली हर ऋतु को भाती जब पथ पुष्प मुसुकाते

गुंजन करते भँवरे पल-पल हवा मदमात बही है॥


बूंदे बरसाती मतवाली आ राहों को घेरती

नहला जाती मन भावों को पथिक पुलकात मही है॥


रिमझिम-रिमझिम सावन सैयां धान-पान परिधान में

टप-टप गेसू टपक रहे जल लगता प्रपात यही है॥


उफन-उफन कर नदियां बहती माझी नौका पार कर

सागर से मिलने को आतुर बिखर औकात ढ़ही है॥


गौतम सम्हल इन लहरों से बिच धारा में जो पले

फिर से दुबारा कौन मिलता कारवां नात यही है॥


महातम मिश्र गौतम गोरखपुरी

अगला लेख: "गीत"चैन की बांसुरी बजा रहे बाबा



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
10 जुलाई 2018
छन्द- वाचिक विमोहा (मापनीयुक्त मात्रिक) मापनी - २१२ २१२"विमोहा छंद मुक्तक"दृश्य में सार हैआप बीमार हैं पूछता कौन क्या कान बेकार है॥-१ आँख बोले नहीं मौन देखे नहीं पाँव जाए कहाँ सार सूझे नहीं॥-२ वेदना साथ है. आयना सार है। दाग दागी नहीं- देखती आँख है॥-३ देख ये बाढ़ है। चेत आष
10 जुलाई 2018
03 जुलाई 2018
मापनी-२१२२ २१२ २१२२ २१२ समांत- आर पदांत- की“गीतिका” गर इजाजत मिल गई नयन से सरकार कीकब खिलाफत हो सकी वचन सुन इजहार कीजब मिले दो दिल कभी समय उठ कहने लगा खिल रही उपवन कली चमन के रखवार की॥क्या हुआ क्यों हर गली में उठा भूचाल है बह रही दरिया शहर
03 जुलाई 2018
26 जुलाई 2018
“मुक्तक” बदला हुआ मौसम बहक बरसात हो जाए। उड़ता हुआ बादल ठहर कुछ बात हो जाए। क्यों जा रहे चंदा गगन पर किस लिए बोलो- कर दो खबर सबको पहर दिन रात हो जाए॥-१ अच्छी नहीं दूरी डगर यदि प्रात हो जाए। नैना लगाए बिन गर मुलाक़ात हो जाए। ले हवा चिलमन उडी कुछ तो शरम करो-सूखी जमी बौंछार
26 जुलाई 2018
16 जुलाई 2018
बह्र- २१२२ २१२२ २१२२ २ काफ़िया- अर रदीफ़- दिया मैंने“गज़ल”क्या लिखा क्योंकर लिखा क्या भर दिया मैंनेकुछ समझ आया नहीं क्या डर दिया मैंनेआज भी लेकर कलम कुछ सोचता हूँ मैंवो खड़ी जिस द्वार पर क्या घर दिया मैंने।।हो सके तो माफ़ करना इन गुनाहों कोजब हवा में तीर थी क्यों शर दिया मैंन
16 जुलाई 2018
06 जुलाई 2018
नई दिल्ली : अगले तीन दिनों में दिल्ली व एनसीआर के लोग अच्छी मॉनसूनी बारिश का मजा ले पाएंगे. अगलेे कुछ दिनों में फिरोजपुर से बेरेली, बहराइच होते हुए बिहार के मुजफ्फरपुर तक एक मॉनसून रेखा बनेेगी. इसके चलते इन इलाकों में 09 जुलाई से अगले कुछ दिनों तक दिल्ली, पंजाब, हरियाणा व
06 जुलाई 2018
05 जुलाई 2018
“कुंडलिया”पढ़ते-पढ़ते सो गया भर आँखों में नींद। शिर पर कितना भार है लगता बालक बींद॥लगता बालक बींद उठाए पुस्तक भारी। झुकी भार से पीठ हँसाए मीठी गारी॥कह गौतम कविराय आँख के नंबर बढ़ते। अभी उम्र नादान गरज पर पोथी पढ़ते॥ महातम मिश्र गौतम गोरखपुरी
05 जुलाई 2018
11 जुलाई 2018
“पिरामिड”वो वहाँ तत्पर बे-खबर प्रतीक्षारत मन से आहतप्यार की चाहत आप यहीं बैठे हैं॥-१ है वहाँ उद्यत आतुरता सहृदयितानैन चंचलता विकल व्याकुलता-२ महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी
11 जुलाई 2018
16 जुलाई 2018
विधान - २५ मात्रा १३ १२ पर यति यति से पूर्व वाचिक १२/लगा अंत में वाचिक २२/गागा क्रमागत दो-दो चरण तुकान्त कुल चार चरण पर मुक्तक में तीसरा चरण का तुक विषम “छंद मुक्तामणि मुक्तक”अतिशय चतुर सुजान का छद्मी मन हर्षायामीठी बोली चटपटी सबका दिल उलझाया पौरुष अपने आप में नरमी गरमी स
16 जुलाई 2018
13 जुलाई 2018
मापनी- २१२ २१२ १२२२ “मुक्तक” हर पन्ने लिख गए वसीयत जो। पढ़ उसे फिर बता हकीकत जो। देख स्याही कलम भरी है क्या- क्या लिखे रख गए जरूरत जो॥-१ गाँव अपना दुराव अपनों से। छाँव खोकर लगाव सपनों से। किस कदर छा रही बिरानी अब- तंग गलियाँ रसाव नपनों से
13 जुलाई 2018
17 जुलाई 2018
धरती के अंदर होने वाली हलचल और इसके प्रभावों पर देश के चार बड़े संस्थानों ने हाल ही में अध्ययन किया है. इसमें यह सामने आया है कि देश में आने वाले समय में आठ से ज्यादा तीव्रता वाले भूकंप आ सकते हैं, जो बड़ी तबाही मचा सकते हैं.यह अध्ययन देहरादून स्थित वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ ह
17 जुलाई 2018
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x