यातना

17 जुलाई 2018   |  गौरीगन गुप्ता   (132 बार पढ़ा जा चुका है)

समय समय की बात यातना का जरिया बदला आमने सामने से ना लेते देते अब व्हाटसअप, फेसबुक से मिलती। जमाना वो था असफल होने पर बेटे ने बाप की लताड से सीख अव्वल आकर बाप का फक्र से सीना चौडा करता, पर अब तो, लाश का बोझ कंधे पर डाल दुनियां से ही अलविदा हो चला। सासूमां का बहू को सताना सुधार का सबक होता था नखरे सह, पंखा झलती थी पर, आज,अब, एक पल भी चूके बिना हवालात की हवा खिलाती।

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