नेल्सन मंडेला अन्तर्राष्ट्रीय दिवस

19 जुलाई 2018   |  Pratibha Bissht   (130 बार पढ़ा जा चुका है)

नेल्सन मंडेला अन्तर्राष्ट्रीय दिवस प्रति वर्ष 18 जुलाई को संयुक्त राष्ट्र द्वारा पूर्व दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति नेल्सन मंडेला के जन्म दिवस की यादगार के रूप में मनाया जाता है। नेल्सन मंडेला अन्तर्राष्ट्रीय दिवस का निर्णय 18 जुलाई 2010 को जब मंडेला 92 वर्ष के हुए तब से प्रति वर्ष मनाने के लिये लिया गया था| संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष अली ट्रेकी ने कहा कि यह निर्णय एक ऐसे महान व्यक्ति को सम्मानित करने के लिये लिया गया जिसने आम लोगों की भलाई के लिये न सिर्फ़ काम किया अपितु उसकी कीमत भी चुकायी|

संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष अली ट्रेकी ने कहा कि यह निर्णय एक ऐसे महान व्यक्ति को सम्मानित करने के लिये लिया गया, जिसने आम लोगों की भलाई के लिये न सिर्फ़ काम किया अपितु उसकी कीमत भी चुकायी|

नेल्सन रोलीह्लला मंडेला दक्षिण अफ्रीका के प्रथम अश्वेत भूतपूर्व राष्ट्रपति थे। राष्ट्रपति बनने से पूर्व वे दक्षिण अफ्रीका में सदियों से चल रहे रंगभेद का विरोध करने वाले अफ्रीकी

नेशनल कांग्रेस और इसके सशस्त्र गुट उमखोंतो वे सिजवे के अध्यक्ष रहे। रंगभेद विरोधी संघर्ष के कारण उन्होंने २७ वर्ष रॉबेन द्वीप के कारागार में बिताये जहाँ उन्हें कोयला खनिक का काम करना पड़ा था। १९९० में श्वेत सरकार से हुए एक समझौते के बाद उन्होंने नये दक्षिण अफ्रीका का निर्माण किया। वे दक्षिण अफ्रीका एवं समूचे विश्व में रंगभेद का विरोध करने के प्रतीक बन गये | संयुक्त राष्ट संघ ने उनके जन्म दिन को नेल्सन मंडेला अन्तर्राष्ट्रीय दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया।


मंडेला का जन्म 18 जुलाई 1918 को म्वेज़ो, ईस्टर्न केप,दक्षिण अफ़्रीका संघ में गेडला हेनरी म्फ़ाकेनिस्वा और उनकी तीसरी पत्नी नेक्यूफी नोसकेनी के यहाँ हुआ था। वे अपनी माँ नोसकेनी की प्रथम और पिता की सभी संतानों में १३ भाइयों में तीसरे थे|मंडेला के पिता हेनरी म्वेजो कस्बे के जनजातीय सरदार थे। स्थानीय भाषा में सरदार के बेटे को मंडेला कहते थे जिससे उन्हें अपना उपनाम मिला। उनके पिता ने इन्हें 'रोलिह्लाला' प्रथम नाम दिया था जिसका खोज़ा में अर्थ "उपद्रवी" होता है। उनकी माता मेथोडिस्ट थी। मंडेला ने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा क्लार्कबेरी मिशनरी स्कूल से पूरी की। उसके बाद की स्कूली शिक्षा मेथोडिस्ट मिशनरी स्कूल से ली। मंडेला जब १२ वर्ष के थे तभी उनके पिता की मृत्यु हो गयी। 1941 में मंडेला जोहन्सबर्ग चले गये| जीवनयापन के लिये वे एक कानूनी फ़र्म में क्लर्क बन गये परन्तु धीर-धीरे उनकी सक्रियता राजनीति में बढ़ती चली गयी। रंग के आधार पर होने वाले भेदभाव को दूर करने के उन्होंने राजनीति में कदम रखा।

५ अगस्त १९६२ को उन्हें मजदूरों को हड़ताल के लिये उकसाने और बिना अनुमति देश छोड़ने के आरोप में गिरफ़्तार कर लिया गया। उन पर मुकदमा चला और १२ जुलाई १९६४ को उन्हें उम्रकैद की सजा सुनायी गयी। सज़ा के लिये उन्हें रॉबेन द्वीप की जेल में भेजा गया किन्तु सजा से भी उनका उत्साह कम नहीं हुआ। उन्होंने जेल में भी अश्वेत कैदियों को लामबन्द करना शुरू कर दिया था। जीवन कारागार में बिताने के बाद अन्ततः 11 फ़रवरी 1990 को उनकी रिहाई हुई।

नेल्सन मंडेला बहुत हद तक महात्मा गांधी की तरह अहिंसक मार्ग के समर्थक थे। उन्होंने गांधी को प्रेरणा स्रोत माना था और उनसे अहिंसा का पाठ सीखा था। इनको लोग दूसरा गाँधी के नाम से भी पुकारते थे या कुछ लोग इन्हे अफ्रीका का गाँधी भी बोलते थे |

नेल्सन मंडेला पहले ऐसे शख्स है जिन्हे भारतीय सरकार ने 1990 में भारत रत्न जैसे अवार्ड से सम्मानित किया | नेल्सन मंडेला दक्षिण अफ्रीका के पहले अश्वेत राष्ट्रपति थे| रंगभेद विरोधी संघर्ष के कारण उन्होंने २७ वर्ष जेल में बिताए थे| मंडेला कहते थे कि मैं २७ सालों की लंबी छुट्टी पर गया था|उनका मानना था की दृढ़ता ,जिद्द और विश्वास से हम अपने हर सपने को पूरा कर सकते हैं| उनके प्रेरणादायक विचार निम्न है-

1 . जब तक काम किया ना जाए वो असंभव ही लगता है|

.२. जब आप कुछ करने की ठान लेते हैं तो आप किसी भी चीज पर काबू पा सकते हैं|

३. अगर आप अपने काम के लिए समर्पित और उत्साही हैं तो सफलता आपके कदम चूमेगी|

४. एक ऊंची पहाड़ी चढ़ने के बाद आपको हमेशा दूसरी पहाड़ियां फतह करने के लिए दिखनी चाहिए|

५. मेरी सफलता को देख आप देखिए, कि मैं कितनी बार गिरा हूं और फिर दोबारा कैसे अपने पैरों पर खड़ा हुआ हूं|

६. शिक्षा सबसे बड़ा हथियार है, जिसका इस्तेमाल दुनिया को बदलने के लिए किया जा सकता है|

७. मनुष्य की अच्छाई ज्योति के समान है, जिसे छुपाया तो जा सकता है लेकिन बुझाया नहीं जा सकता|

८. पैसों से सफलता नहीं मिलती, पैसे कमाने की स्वतंत्रता से सफलती मिलती है|

९. हमें समय का उपयोग बुद्धिमानी से करना चाहिए और इस बात को याद रखना चाहिए कि कोई भी काम करने का कोई गलत समय नहीं होता| समय पर सब काम कर देना चाहिए|

१०. मुसीबतें किसी को तोड़ती हैं तो किसी को मजबूत भी बनाती हैं| कोई भी कुल्हाड़ी इतनी तेज नहीं होती कि वो लगातार प्रयास करने वाले के हौसले को तोड़ सके|

दक्षिण अफ्रीका के लोग मंडेला को व्यापक रूप से "राष्ट्रपिता" मानते थे। उन्हें "लोकतन्त्र के प्रथम संस्थापक",राष्ट्रीय मुक्तिदाता और उद्धारकर्ता" के रूप में देखा जाता था। 2004 में जोहनसबर्ग में स्थित सैंडटन स्क्वायर शॉपिंग सेंटर में मंडेला की मूर्ति स्थापित की गयी और सेंटर का नाम बदलकर नेल्सन मंडेला स्क्वायर रख दिया गया। दक्षिण अफ्रीका में प्रायः उन्हें मदीबा कह कर बुलाया जाता है जो बुजुर्गों के लिये एक सम्मान-सूचक शब्द है। मंडेला को विश्व के विभिन्न देशों और संस्थाओं द्वारा 700 से भी अधिक सम्मान और पुरस्कार प्रदान किए गए हैं, इसमें विश्व के कई नामी- गिरामी विश्विद्यालयों से प्राप्त मानद डिग्री, विभिन्न देशो के नागरिक सम्मान,नोबल अवार्ड भी शामिल है |

1. 1993 में दक्षिण अफ्रीका के पूर्व राष्ट्रपति फ़्रेडरिक विलेम डी क्लार्क के साथ संयुक्त रूप से नोबेल शांति पुरस्कार

2. प्रेसीडेंट मैडल ऑफ़ फ़्रीडम

3. ऑर्डर ऑफ़ लेनिन

4. भारत रत्न

5. निशान-ए–पाकिस्तान

6. 23 जुलाई 2008 को गाँधी शांति पुरस्कार

नेल्सन मंडेला ने दक्षिण अफ्रीका का राष्ट्रपति पद छो़ड़ने के बाद दुनियाभर में लोकतंत्र के समर्थन, मानव अधिकार और एड्स की रोकथाम से संबंधित अभियान चलाया था. एड्स की रोकथाम के लिए उनके योगदान को समर्थन देने के लिए बाद में ४६६६४ नाम से अभियान शुरू किया गया. यह नंबर दरअसल, जेल में रहने के दौरान नेल्सन मंडेला का कैदी नंबर था|

अन्तर्राष्ट्रीय नेल्सन दिवस का उद्देश्य लोगो को विश्व शांति और सौहार्द हेतु बदलाव लाने की लिए प्रेरित करना है|

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