“चतुष्पदी”सुना था कल की नीरज नहीं रहे।

20 जुलाई 2018   |  महातम मिश्रा   (72 बार पढ़ा जा चुका है)

सादर नमन साहित्य के महान सपूत गोपाल दास ‘नीरज’ जी को। ॐ शांति।


“चतुष्पदी”


सुना था कल की नीरज नहीं रहे।

अजी साहित्य के धीरज नहीं रहे।

गोपाल कभी छोड़ते क्या दास को-

रस छंद गीत के हीरज नहीं रहे॥


महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी

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