राहुल गांधी जी को अभी राजनीति का ककहरा सीखना है

21 जुलाई 2018   |  शोभा भारद्वाज   (164 बार पढ़ा जा चुका है)

राहुल गांधी जी को अभी राजनीति का ककहरा सीखना है

श्री राहुल गांधी को अभी राजनीति का ककहरा सीखना है ,


डॉ शोभा भारद्वाज


लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव के दौरान गरमागर्म बहस चल रही थी देश के दर्शक कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी के विचार सुनने के उत्सुक थे वह अक्सर बढ़ चढ़ कर बोलते थे जब वह सदन में भाषण देंगे जलजला आ जाएगा मोदी जी उनके सामने खड़े नहीं हो सकेंगे देश उनके ऐसे भाषण का इंतजार कर रहा था मोदी जी जैसा परिपक्व राजनीति के खिलाड़ी के सामने कैसा भाषण होगा या उनके व्यक्तित्व को ही चुनौती दे दी जायेगी ? सदन में देश के उत्तम महान सांसद पक्ष एवं विपक्ष में अपने विचार रखते रहे हैं दर्शक इन भाषणों को विभोर होकर सुनते थे | तब सदन में शोर मचाना वेळ में आकर हंगामा करना ,कागज फाड़ कर अध्यक्ष महोदय के सामने उड़ाने की प्रथा नहीं थी हाँ सदन से वाक आउट कर जाते थे|


शोध के विद्यार्थी घंटो लोकसभा की लायब्रेरी में बैठ कर उन भाषणों को पढ़ते हैं इन्हें प्राईमरी सोर्स माना जाता है अपनी थिसिज के फुट नोट में विवरण सहित उनका जिक्र करते हैं नियम है सदन में दिए गये भाषण प्रमाण सहित दिए जायें यह चुनावी भाषण नहीं होने चाहिए | लोकसभा में राहुल जी जम कर बोले कुछ विषय अप्रमाणित भी थे जैसे फ्रांस के साथ हुई राफेल डील पर राहुल ने कहा वह फ्रांस के राष्ट्रपति मेक्रो से मिले थे उन्होंने बताया राफेल जेट विमान पर भारत और उनके बीच कोई गोपनीय समझौता नहीं हुआ था प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी एवं रक्षा मंत्री सीता रमण ने देश के सामने झूठ बोला था रक्षा मंत्री श्रीमती सीतारमण ने तुरंत उनके भाषण के बाद प्रमाण सहित उनके कथन को काटा| सदन को बताया यह डील डॉ मनमोहन सिंह के प्रधान मंत्री काल में हुई थी| राहुल के भाषण के कुछ समय बाद ही फ्रांस की तरफ से ब्यान जारी कर श्री राहुल के दावों को खारिज किया गया दो देशों के सम्बन्धों पर ऐसा अटपटा ब्यान |


भाषण समाप्त करने से पहले राहुल मोदी जी की तरफ बढ़े उन्हें पहले उठने का इशारा किया मोदी जी के चेहरे पर अचरज का भाव था कांग्रेस अध्यक्ष राहुल ने उन्हें गले लगा लिया अब मोदी जी सम्भले उन्होंने उन्हें पुन: बुला कर उनकी पीठ थपथपा कर कुछ कहा | दर्शको को लगा राहुल राजनीति में नई शुरुआत कर रहे हैं जैसे ही अपने सलाहकारों के पास जाकर बैठे जिस तरह आँख मार कर आँख चलाई समझ में आ गया एक क्रिकेटर के विकट लेने जैसे विजयी भाव का परिचय दे रहें हैं बस इशारे का फर्क है |


यह उनके अपने साथियों की मिली भगत का नमूना था , बचकानी हरकत कांग्रेस में विद्वानों की कमी नहीं है एक से एक बेहतरीन राजनीतिज्ञ एवं कूटनीतिज्ञ हैं यदि भाषण में उठाये विषयों एवं भाषण के समापन के बाद देश के प्रधान मंत्री को जादू की जप्फी देनें की उनसे सलाह ली होती वह उन्हें मना करते राहुल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष हैं भारत जैसे विशाल प्रजातांत्रिक देश के प्रधान मंत्री ही नहीं महा गठ्बन्धन के नेतृत्व की इच्छा रखते हैं नेहरू गांधी परिवार के राजनीतिक वारिस समझे जाते हैं उनका राजनीति में अधकचरेपन का परिचय वह भी मोदी जी जैसे उत्तम कूटनीतिज्ञ के सामने?

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