आजकल

23 जुलाई 2018   |  रवि रंजन गोस्वामी   (73 बार पढ़ा जा चुका है)

आजकल

ठहरे पानी में पत्थर उछाल दिया है ।

उसने यह बड़ा कमाल किया है ।


वह तपाक से गले मिलता है आजकल ।

शायद कोई नया पाठ पढ़ रहा है आजकल ।


आँखों की भाषा भी कमाल है ।

एक गलती और सब बंटाधार है ।

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