आज का शब्द (१२)

23 अप्रैल 2015   |  शब्दनगरी संगठन   (254 बार पढ़ा जा चुका है)

आज का शब्द (१२)

विहग :

१- पक्षी


२- तीर, बाण


३- सूर्य


४-चन्द्रमा


प्रयोग : रंग-बिरंगे विहग देखकर बच्चों की खुशी का ठिकाना न रहा I

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किंकर्तव्यविमूढ़ : १-दुविधा की स्थिति, २-भौचक्का या अवाक रह जाना, ३-जो यह न समझ सके की उसे अब क्या करना चाहिए जैसे-आपको कोई एक निर्णय तो लेना ही होगा कि जीवन में नौकरी करोगे या व्यापार, लेकिन इस तरह किंकर्तव्यविमूढ़ होकर बैठने से कोई लाभ नहीं होगा I शुक्रवार, १० अप्रैल, २०१५
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यार मदारी! तुम अच्छे हो; रस्सी पर चल लेते हो, लोहे के छल्ले से कैसे ये करतब कर लेते हो? एक पैसे से दो फिर दो से, चार उन्हें कर देते हो; हाँ तो जमूरे कह-कह के, क्या से क्या कर देते हो I कालू-भालू और बंदरिया सबको नचाते एक उंगली पर, एक डुगडुगी की थापों पर सबका मन हर लेते हो I जीवन की पगडंडी पर, मु
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रजत : १-चांदी, रूपा; २-हाथी दांत; ३-मुक्ताहार; ४-धवल रंग; ५-चांदी का बना हुआ, चांदी के रंग का, उज्जवल, शुभ: प्रयोग: तैराकी प्रतियोगिता में तीन खिलाड़ियों को रजत पदक से सम्मानित किया गया. रविवार, १२ अप्रैल, २०१५
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