“मुक्तक” बदला हुआ मौसम बहक बरसात हो जाए।

26 जुलाई 2018   |  महातम मिश्रा   (127 बार पढ़ा जा चुका है)

 “मुक्तक” बदला हुआ मौसम बहक बरसात हो जाए।

“मुक्तक”


बदला हुआ मौसम बहक बरसात हो जाए।

उड़ता हुआ बादल ठहर कुछ बात हो जाए।

क्यों जा रहे चंदा गगन पर किस लिए बोलो-

कर दो खबर सबको पहर दिन रात हो जाए॥-१

अच्छी नहीं दूरी डगर यदि प्रात हो जाए।

नैना लगाए बिन गर मुलाक़ात हो जाए।

ले हवा चिलमन उडी कुछ तो शरम करो-

सूखी जमी बौंछार की सौगात हो जाए॥-२


महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी

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