मैं और मेरे गुरु

27 जुलाई 2018   |  गौरीगन गुप्ता   (90 बार पढ़ा जा चुका है)

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शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
14 जुलाई 2018
मृ
भावनाओं का चक्रव्यूह तोड़ स्मृतियों के मकड़जाल से निकल कच्ची छोड़,पक्की डगर पकड़ लालसाओं के खुवाओं से घिराभ्रमित मन का रचित संसार लिए.....रेगिस्तान में कड़ी धूप की जलधारा की भांति सपनें पूरे करने......चल पड़ा एक ऐसी डगर.......अनजानी राहें,नए- लोग चकाचौंध की मायावी दुनियां ऊँची-ऊँची इमारतों जैसे ख्वाब हकीक
14 जुलाई 2018
02 अगस्त 2018
गुरु 2006 की हिंदी फिल्म है। हमारे पास 3 गाने के गीत और गुरु का एक वीडियो गीत है। एआर रहमान ने अपना संगीत बना लिया है। एआर रहमान, चिन्मययी श्रीपाडा, केरथी सागाथिया, मैरीम टोलर और श्रेया घोषाल ने इन गीतों को गाया है, जबकि गुलजार ने अपने गीत लिखे हैं।इस फिल्म के गाने बरसो रे मेघा मेघातेरे बिनामैया मैय
02 अगस्त 2018
22 जुलाई 2018
आषाढ़ शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा के रूप में पूरे देश में उत्साह के साथ मनाया जाता है| भारतव र्ष में कई विद्वान गुरु हुए हैं, जिन्होंने सनातन धर्म (हिन्दू धर्म) के चारों वेदों की व्याख्या की थी| कहते है जैसे सूर्य की गर्मी से तपती भूमि को
22 जुलाई 2018
02 अगस्त 2018
गुरु से माया माया गीत: यह गीत मैरीम टोलर, चिन्मययी श्रीपाड़ा और केर्थी सगाथिया की शानदार आवाज़ में है। माया माया संगीत एआर रहमान द्वारा रचित है और गीत गुलजार द्वारा लिखे गए हैं। मल्लिका शेरावत ने इस गीत पर प्रदर्शन किया है।गुरु (Guru )मैया मैया की लिरिक्स (Lyrics Of Mayya Mayya )तू नील समुन्दर है
02 अगस्त 2018
01 अगस्त 2018
बहुत देख ली आडंबरी दुनिया के झरोखों से बहुत उकेर लिए मुझे कहानी क़िस्सागोई में लद गए वो दिन, कैद थी परम्पराओं के पिंजरे में भटकती थी अपने आपको तलाशने में उलझती थी, अपने सवालों के जबाव ढूँढने में तमन्ना थी बंद मुट्ठी के सपनों को पूरा करने की उतावली,आतुर हकीकत की दुनिया जीने की दासता की जंजीरों को तो
01 अगस्त 2018
17 जुलाई 2018
या
समय समय की बात यातना का जरिया बदला आमने सामने से ना लेते देते अब व्हाटसअप, फेसबुक से मिलती। जमाना वो था असफल होने पर बेटे ने बाप की लताड से सीख अव्वल आकर बाप का फक्र से सीना चौडा करता, पर अब तो, लाश का बोझ कंधे पर डाल दुनियां से ही अलविदा हो चला। सासूमां का बहू को सताना सुधार का सबक होता था नखरे
17 जुलाई 2018
05 अगस्त 2018
रा
राषटर् कविमानस भवन में आरय़जनजिसकी उतारे आरती।भगवान भारतव्रष मेंगूंजें हमारी भारती।। हिंदी साहित्य के राष्ट्र कवि पद्मभूषण से सम्मानित श्री मैथलीशरणगुप्त जी का जन्म ३ अगस्त,१८८५में उत्तर प्रदेश के जिला झाँसी के चिरगांव में हुआ था.हम सब प्रतिवर्ष जयंती कोकवि दिवस के रूप में मनाते हैं.अपनी पहली काव्य
05 अगस्त 2018
23 जुलाई 2018
लाठी की टेक लिए चश्मा चढाये,सिर ऊँचा कर मां की तस्वीर पर,एकटक टकटकी लगाए,पश्चाताप के ऑंसू भरे,लरजती जुवान कह रही हो कि,तुम लौट कर क्यों नहीं आई,शायद खफा मुझसे,बस, इतनी सी हुई,हीरे को कांच समझता रहा,समर्पण भाव को मजबूरी का नाम देता,हठधर्मिता करता रहा,जानकर भी, नकारता र
23 जुलाई 2018
06 अगस्त 2018
बू
आसमां से धरती तक पदयात्रा करती हरित पर्ण पर मोती सी चमकती बूंद बूंद घट भरे बहती बूंदे सरिता बने काली ने संहार कर एक एक रक्त बूंद चूसा बापू ने रक्त बूंद बहाये बिना नयी क्रांति का आह्वान किया बरसती अमृत बूंदें टेसू पूनम की रोगी काया को निरोगी करे मन को लुभाती ओस की बूंदें क्षणभंगुर सम अस्तित्व का ज
06 अगस्त 2018
16 जुलाई 2018
मै
मैं और मेरा शहर सौन्दर्यीकरण का अद्भुत नमूना शोरगुल भरें, चकाचौंध करते जातपात, धर्म वाद से परे पर अर्थ वाद की व्यापकता बचपन की यादों से जुडा मेरी पहचान का वो हिस्सा जानकर भी अनजान बने रहते आमने सामने पड जाते तो कलेजा उडेल देते प्रदूषण, शोर, भीड़ भरा शहर ना पक्षियों की चहचहाहट भोर होने का एहसास करात
16 जुलाई 2018
17 जुलाई 2018
समांत- अही पदांत- है मात्रा भार-२९ १६ १३ पर यति “गीतिका”हर मौसम के सुबह शाम से इक मुलाक़ात रही है सूरज अपनी चाल चले तो दिन और रात सही है भोर कभी जल्दी आ जाती तब शाम शहर सजाती रात कभी दिल दुखा बहकती वक्त की बात यही है॥हरियाली हर ऋतु को भाती जब पथ पुष्प मुसुकाते गुंजन करते
17 जुलाई 2018
23 जुलाई 2018
प्रेम और ध्यान मैंने देखा, औरमैं देखती रही / मैंने सुना, और मैं सुनती रही मैंने सोचा, औरमैं सोचती रही / द्वार खोलूँ या ना खोलूँ |प्रेम खटखटातारहा मेरा द्वार / और भ्रमित मैं बनी रही जड़ खोई रही अपनेऊहापोह में |तभी कहा किसीने / सम्भवतः मेरी अन्तरात्मा ने तुम द्वार खो
23 जुलाई 2018
12 जुलाई 2018
टे
मुंह अँधेरे ही भजन की जगह,फोन की घंटी घनघना उठी,घंटी सुन फुर्ती आ गई,नही तो,उठाने वाले की शामत आ गई,ड्राईंग रूम की शोभा बढाने वाला,कचड़े का सामान बन गया,जरूरत अगर हैं इसकी,तो बदले में कार्डलेस रख गया,उठते ही चार्जिंग पर लगाते,तत्पश्चात मात-पिता को पानी पिलाते,दैनान्दनी से निवृत हो,पहले मैसेज पढ़ते,बा
12 जुलाई 2018
04 अगस्त 2018
रामू की माँ तो अपने पति के शव पर पछाड़ खाकर गिरी जा रही थी.रामू कभी अपने छोटे भाई बहिन को संभाल रहा था ,तो कभी अपनी माँ को.अचानक पिता के चले जाने से उसके कंधों पर जिम्मेदारियों का बोझ आ पड़ा था.पढ़ाई छोड़,घर में चूल्हा जलाने के वास्ते रामू काम की तलाश में सड़को की छान मारता।अंततःउसने घर-घर जाकर रद्दी बेच
04 अगस्त 2018
15 जुलाई 2018
ज़ि
हाथ से रेत फिसलती रही वक़्त के साथ दुनिया बदलती रही जिन्दगी तुझे देखा तो तबियत बिमार कि बहलती रही हाथ से रेत फिसलती रही मौसम को भी
15 जुलाई 2018
27 जुलाई 2018
मातृवत्लालयित्री च, पितृवत् मार्गदर्शिका, नमोऽस्तुगुरुसत्तायै, श्रद्धाप्रज्ञायुता च या ||वास्तव में ऐसीश्रद्धा और प्रज्ञा से युत होती है गुरु की सत्ता – गुरु की प्रकृति – जो माता केसामान ममत्व का भाव रखती है तो पिता के सामान उचित मार्गदर्शन भी करती है | आज गुरु पूर्णिमा
27 जुलाई 2018
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