अंडमान और निकोबार

28 जुलाई 2018   |  Pratibha Bissht   (211 बार पढ़ा जा चुका है)

 अंडमान और निकोबार

अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह एक केंद्रशासित प्रदेश है | यह 572 द्वीपों का समूह बंगाल की खाड़ी में स्थित है तथा म्यांमार के नेगरिस अंतरीप से 193 किलोमीटर, कोलकाता से 1255 किलोमीटर और चेन्नई से 1190 किलोमीटर की दूरी पर है। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह को स्नेह से “एमरल्ड आइलैंड्स” (पन्ने जैसा द्वीप) कहा जाता है। पोर्ट ब्लेयर अंडमान और और निकोबार द्वीप समूह की राजधानी है।

निकोबार द्वीपसमूह अंडमान के दक्षिण में छोटे अंडमान द्वीप से 121 किलोमीटर दूर है। यहां आबादी वाले कुल 38 द्वीप हैं जिनमें 25 अंडमान में और 13 निकोबार जिले में हैं। इस द्वीप समूह के मूल निवासी जंगलों में रहते थे और शिकार तथा मछलियां पकड़कर अपना गुजारा चलाते थे। अंडमान के द्वीपसमूहों में महा अंडमानी, ओंगे, जरवा और सेंटीनली नाम की चार निग्रेटो जातियां हैं तथा निकोबार द्वीपसमूह में निकोबारी तथा शोमपेन नाम की दो मंगोलायड जातियां हैं।

19 वीं सदी के मध्य में ब्रिटिश तथा भारतीय लोग अंडमान निकोबार में बस गए थे| उन के सांस्कृतिक विकास के तहत यहाँ हिंदी व अंग्रेजी भाषा का विकास हुआ है|

इस द्वीप समूह पर 17 वीं सदी में मराठों का अधिकार था और मराठो के बाद इस द्वीप समूह पर अंग्रेजों का शासन हो गया और दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान जापान ने इस पर अधिकार कर लिया| देश में कहीं भी पहली बार पोर्ट ब्लेयर में ही तिरंगा फहराया गया था| यही कारण है की अंडमान निकोबार प्रशासन हर साल 30 दिसम्बर को एक भव्य कार्यक्रम आयोजित करता है। 1947 में आजादी के बाद यह भारत का केन्द्र शासित प्रदेश बना। भारतीय इतिहास में ‘काला पानी’ के नाम से प्रसिद्ध अंडमान द्वीप, अब एक बेहतरीन पर्यटक स्थल के रूप में विख्यात हो चुका है |


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प्राकृतिक खूबसूरती से भरपूर अंडमान निकोबार में देखने लायक पर्यटन स्थल :

सैलुलर जेल : यहां के प्रमुख दर्शनीय स्थानों में से एक है सैलुलर जेल | यह कारागार 7 शाखाओं में बंटा हुआ है, इस कारागार के पास एक पुराना पीपल का पेड़ स्थित है जो सैकड़ों भारतीय स्वाधीनता सेनानियों पर किए गए अंगरेजी सरकार के अत्याचार का मूक गवाह है | ब्रिटिश शासकों ने सैलुलर जेल की नींव 1897 में रखी थी | इस के अंदर 694 कोठरियां हैं जिन्हें इस तरह बनाया गया था कि कैदियों का आपस में मेलमिलाप न हो पाए | औक्टोपस की तरह कई शाखाओं का फैलाव लिए इस विशालकाय कारागार के अब केवल 3 अंश बचे है | इस कारागार की दीवारों पर उन शहीदों के नाम खुदे हैं जिन्होंने देश पर अपने प्राण न्योछावर कर दिए | जेल के पास एक संग्रहालय स्थित है इस में उन अस्त्र शस्त्रों को सुरक्षित रखा गया है जिन से स्वाधीनता सेनानियों पर अत्याचार किए जाते थे | इस के साथ ही कुछ दुर्लभ दस्तावेज भी मौजूद हैं |

कार्बिन कोव्स बीच : हरे भरे वृक्षों से घिरा कार्बिन कोव्स बीच एक मनोरम स्थल है | जहां आप समुद्र में डुबकी लगा कर तैरते हुए पानी के नीचे की दुनिया का आंकलन कर सकते हैं | सैलानीयो को यहां से सूर्यास्त का अद्भुत नजारा भी बहुत आकर्षित हैं | यह बीच प्राकृतिक खूबसूरती के लिए जाना जाता है |

रौस आइसलैंड : पोर्टब्लेयर के नजदीक स्थित ‘रौस द्वीप’, छोटी छोटी खाडि़यों से घिरा यह छोटा सा द्वीप अपनी खूबसूरती के लिए जाना जाता है | 50 वर्षों से भी ज्यादा समय तक यह अंगरेजों के अधीन था | यहां स्थित ब्रिटिशकालीन खंडहरों में वास्तुशिल्प के बेजोड़ नमूने देखे जा सकते हैं | यह द्वीप 200 एकड़ में फैला हुआ है | फीनिक्स उपसागर से नाव द्वारा कुछ ही मिनटों में यहां पहुंचा जा सकता है |

पिपोघाट फार्म : 80 एकड़ में फैले पिपोघाट फार्म में दुर्लभ प्रजातियों के पेड़पौधों और अनेक जीवजंतुओं का अवलोकन किया जा सकता है | एशिया की सब से प्राचीन लकड़ी कटाई की मशीन ‘छाथम सौ मिल’ यहीं पर है| इस के अलावा यहां 2 संग्रहालय और चिडि़याघर भी देखने योग्य हैं | पैलियोलिथिक युग में रहने वाले मनुष्यों की जीवनशैली का संपूर्ण चित्रण यहां स्थित समुद्री म्यूजियम में मौजूद है|

पोर्टब्लेयर : आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित अंडमान की राजधानी पोर्टब्लेयर में पर्यटकों की सुविधाओं और उन के मनोरंजन के कई इंतजाम किए गए हैं| यहां जलक्रीड़ा की भी व्यवस्था है जो एक आकर्षण का केंद्र है यहां स्थित ‘माउंट हैरी’ पिकनिक स्पॉट के रूप में मशहूर है|


ब्रिटिशो के आधीन भारत से लाए गए बंदियों को पोर्ट ब्लेयर के पास वाइपर द्वीप पर उतारा जाता था | अब इसे भी एक पिकनिक स्पॉट के रूप में विकसित कर दिया गया है | यहां पर सी बोटिंग, वाटर स्कीइंग, वाटर सर्फिंग, वाटर स्कूटर की सुविधाएं उपलब्ध हैं | यहां वाटर ऐडवैंचर गेम्स का भी लुत्फ उठाया जा सकता है |

महात्मा गांधी मरीन नेशनल पार्क: महात्मा गांधी मरीन नेशनल पार्क अंदमान के सबसे लोकप्रिय आकर्षणों में से एक है। इस पार्क को 1983 में स्थापित किया गया था | ये पार्क वंडूर नेशनल पार्क के रूप में भी जाना जाता है। यहाँ पार्क बंगाल की खाड़ी में अंडमान के दक्षिण पश्चिमी तट पर स्थित है। नेशनल पार्क को इस क्षेत्र के तेजस्वी कोरल ,समुद्री कछुए और समुद्री जीवन की रक्षा करने के उद्देश्य से स्थापित किया गया था। महात्मा गांधी मरीन नेशनल पार्क में में विभिन्न प्रकार की रंगीन मछलियों, प्रवाल भित्तियों ,मोलस्क, मगरमच्छ ,कछुए स्टारफ़िश आदि शामिल हैं।

हैवलॉक द्वीप: हैवलॉक द्वीप अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह की राजधानी पोर्ट ब्लेयर के उत्तर-पूर्व में लगभग 38 कि.मी. दूर स्थित है। हैवलॉक के कई निवासी सन् 1971 में बांग्लादेश स्वाधीनता युद्ध के दौरान आए शरणार्थी और उनके वंशज हैं जिन्हें भारत सरकार यहां बसाया था। इस द्वीप पर पाँच गांव हैं: गोविन्दा नगर, विजय नगर,श्याम नगर, कृष्ण नगर और राधा नगर। भारत सरकार ने यहां पर्यावरण के विकास के लिए विकसित किया है और अब यहां के तट विश्व प्रसिद्ध हैं।


एक अंग्रेजी पत्रिका ने हैवलॉक द्वीप को एशिया का सबसे अच्छा तट घोषित किया गया था। हैवलॉक आइलैंड अंडमान द्वीप समूह में ट्रॉपिकल आइलैंड पैराडाइज के नाम से जाना जाने वाला खूबसूरत बीच है| इस द्वीप के समुद्र तट के किनारे-किनारे मैनग्रोव वृक्ष की ख़ूबसूरत कतारें है।

अंडमान और निकोबार में खरीदारी का मुख्य बाजार पोर्ट ब्लेयर में है। इन दुकानों में कई आकार के मूंगों और शंखों से बने स्मृति चिह्न मिलते हैं। अंडमान और निकोबार में खरीदारी के दौरान लोकप्रिय कई तरह की कलाकृतियों देखने को मिलती है जैसे: शैल से बने ईयरिंग्स,ब्रेसलेट्स और कलाकृतियां मोतियों से बने जेवर और कलाकृतियां ताड़ से बनी चटाइयां नारियल के छिलके से बने लैम्प-शेड, लाठी, कटोरियां, ट्रे ,एश-ट्रे और फर्नीचर खास तौर पर स्थानीय पादौक लकड़ी से बना बांस बेंत के शिल्प, निकोबारी चटाइयां| पोर्ट ब्लेयर का मुख्य व्यवसायिक केंद्र है आबेरदीन बाजार। कुछ सरकारी एम्पोरियम के साथ ही यहां कई निजी दुकानें, फूड जॉइंट्स और पब भी हैं।

अंडमान और निकोबार द्वीप समूह की यात्रा का सबसे अच्छा वक्त दिसंबर और अप्रैल के बीच के महीने हैं।

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