“देशज गीत” जिनगी में आइके दुलार कइले बाट

31 जुलाई 2018   |  महातम मिश्रा   (81 बार पढ़ा जा चुका है)

“देशज गीत”


जिनगी में आइके दुलार कइले बाट

गज़ब राग गाइके सुमार कइले बाट

नीक लागे हमरा के अजबे ई छाँव बा

कस बगिया खिलाइ के बहार कइले बाट॥......जिनगी में आइके दुलार कइले बाट


फुलाइल विरान वन चम्पा चमेली

कान-फूंसी करतानी सखिया सहेली

मनवा डेरात मोरा पतझड़ पहारू

रात-दिन सावन जस फुहार कइले बाट॥.....जिनगी में आइके दुलार कइले बाट


देख न उड़ी के हेरा जइह भौंरा

छोड़ि के दुवार घर आ गइली चौरा

प्रेम विश्वास कइली नाहीं घर पलानी

वाण मोहिनी चलाइके बीमार कइले बाट॥.....जिनगी में आइके दुलार कइले बाट


हाथ पकड़ि के लगाव पिया मेंहदी

कबहूं पराइ के न होइह बेदर्दी

गरवा लगाइ ल जुड़ाइ जा सम्हारू

अधखिले बसंत में विहार कइले बाट॥.....जिनगी में आइके दुलार कइले बाट


महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी

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