सम्मान अमर वाणी-2015

06 मई 2015   |  शब्दनगरी संगठन   (130 बार पढ़ा जा चुका है)

सम्मान अमर वाणी-2015

मित्रो,


अखिल भारतीय कवि सम्मलेन में सुप्रसिद्ध कवियों की उपस्थिति में अमर उजाला द्वारा आयोजित रियलिटी शो अतुल माहेश्वरी अमर वाणी--2015 सम्मान समारोह, विगत 03 मई 2015 को शहर के नवोदित कवियों व काव्यपाठ के रसिक श्रोताओं के मध्य काव्यपाठ की बौछारों के साथ संपन्न हुआ I इसमें सर्वश्रेष्ठ कवियों की श्रेणी में विजेता रहे, ज़हीर कानपुरी तथा मोहम्मद नूरैन खान I इस अवसर पर मशहूर शायर वसीम बरेलवी, शकील जमाल, कवि के डी शर्मा हाहाकारी, गीतकार सोम ठाकुर, विष्णु सक्सेना, कवि यशपाल यश, गीतकार अंसार कंबरी, मदन मोहन समर, डॉo श्लेष गौतम, शकील जमाली, हास्य कवि लटूरी सिंह लट्ठ, रामकिशोर वर्मा और कवियत्री अना देहलवी ने अपनी कविताओं से खूब रंग जमाया I प्रतिभागी कवियों में सर्वश्रेष्ठ दोनों कवियों को 11 -11 हज़ार रूपए तथा प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।


मशहूर शायर वसीम बरेलवी की उपस्थिति ने इस अवसर की गरिमा में चार-चाँद लगा दिए। कविता और शायरी की बात करते हुए उन्होने कहा कि...’जिसके अंदर की टूटन और एहसास ने कलम का सहारा ले लिया, वो शायर हो गया। उनका मानना है कि सब्र, आदाब, तहज़ीब, तजुर्बा और खुदा की बंदगी एक शायर के लिए बेहद ज़रूरी हैं।


ज़रा सा क़तरा कहीं आज अगर उभरता है,


समंदरों ही के लहजे में बात करता है I


खुली छतों के दीये कब के बुझ गए होते,


कोई तो है जो हवाओं के पर कतरता है।


शराफ़तों की यहाँ कोई अहमियत ही नहीं,


किसी का कुछ न बिगाड़ो तो कौन डरता है।


ज़मीन की कैसी विक़ालत हो फिर नहीं चलती,


जब आसमान से कोई फैसला उतरता है।


तुम आ गए हो तो फिर कुछ चाँदनी सी बातें हों,


ज़मीन पे चाँद कहाँ रोज़-रोज़ उतरता है।


जनाब वसीम बरेलवी साहब मशहूर शायर होने के साथ-साथ रुहेलखंड विश्वविद्यालय में उर्दू विभाग में प्रोफेसर भी हैं I आपकी कुछ प्रमुख कृतियाँ हैं,'आँखों-आँखों रहे', 'मौसम अंदर-बाहर के', 'तबस्सुमें ग़म', 'आंसू मेरे दामन तेरा', 'मिज़ाज' और 'मेरा क्या' I


चित्र : मशहूर शायर वसीम बरेलवी (बांये) व् शब्दनगरी प्रतिनिधि रजत प्रताप सिंह

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