आंसुओं का बैंक बैलेंस

06 मई 2015   |  शब्दनगरी संगठन   (317 बार पढ़ा जा चुका है)

आंसुओं का बैंक बैलेंस

प्रिय मित्रो,


सन 1934, बरेली में जन्मे जाने-माने व्यंग्यकार और फिल्म पटकथा लेखक के पी सक्सेना के ज़बरदस्त लेखन से आप भली-भांति परिचित होंगे। उनकी गिनती वर्तमान समय के प्रमुख व्यंग्यकारों में होती है। हम ये कह सकते हैं कि यदि आपने हरिशंकर परसाई और शरद जोशी की रचनाएँ पढ़ी हैं तो के पी सक्सेना के व्यंग्य भी अपने ज़रूर पढे होंगे। उन्होंने लखनऊ के मध्यवर्गीय जीवन को लेकर अपनी रचनायें लिखीं। उनके लेखन की शुरुआत उर्दू में उपन्यास लेखन के साथ हुई थी लेकिन बाद में अपने गुरु अमृत लाल नागर की सलाह से हिन्दी व्यंग्य के क्षेत्र में आ गये। उनकी लोकप्रियता इस बात से ही आँकी जा सकती है कि आज उनकी लगभग पन्द्रह हजार प्रकाशित फुटकर व्यंग्य रचनायें हैं जो स्वयं में एक कीर्तिमान है। उनकी पाँच से अधिक फुटकर व्यंग्य की पुस्तकों के अलावा कुछ व्यंग्य उपन्यास भी छप चुके हैं। भारतीय रेलवे में नौकरी करने के अलावा हिन्दी पत्र-पत्रिकाओं के लिये व्यंग्य लिखा करते थे। उन्होंने हिन्दी फिल्म लगान, हलचल और स्वदेश की पटकथायें भी लिखी थी। उन्हें वर्ष 2000 में भारत सरकार द्वारा पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। व्यंग्य लेखन का वो चितेरा तो आज हमारे बीच नहीं है, लेकिन उसकी लेखनी का बैंक-बैलेन्स असंख्य रचनाकारों के लिए सुंदर-सजीले लेखन की प्रेरणा देता रहेगा। 'शब्दनगरी' से आपके लिए भेज रहे हैं सुप्रसिद्ध व्यंग्यकार के पी सक्सेना द्वारा समय के खाते में जमा 'आंसुओं का बैंक बैलेंस'...


आंसुओं का बैंक बैलेंस


अभी तक भी यही समझता था कि आंसुओं की कोई कीमत नहीं होती...बस, यूं ही फोकट में बह जाते हैं।
...मगर नहीं, केलीफोर्निया की एक लेडी किलीरिन मार्गरेट ने मरते-मरते मेरा भ्रम दूर कर दिया। हुआ यूं कि, दुनिया से खर्च होते वक्त मार्गरेट के पास अस्सी हजार डालर की रकम थी। आगे नाथ, न पीछे पगहा। सो वसीयत कर गई कि रकम उनके अन्तिम संस्कार में शामिल होने वालों में बांट दी जाए।... किस तरह? जो चुपचाप शामिल हों उन्हें पांच-पांच डालर...जो चीख-चीख कर रोए और सीना पीटें, उन्हें पचास-पचास डालर।...मार्गरेट गुजर गयी।...जनाजे में ५०० लोग शरीक हुए। सबके सब दहाड़े मार-मार कर सीना पीटते हुए रो रहे थे। अन्तत: अपने आंसुओं की नकद कीमत वसूल कर अपने घर लौट गये।

मैं इस घटना से रत्ती-भर प्रभावित नहीं हुआ।...काहे से कि मैं उस देश में रह रहा हूं जहां नकली आंसू थोक के भाव लीटरों बह रहे हैं।..और नकदी कैश करा रहे हैं।...इन नकली आंसुओं के पीछे ३६ वर्षों की प्रगति का पूरा इतिहास है। देश की चिन्ता और समस्याओं पर निरन्तर बहते आंसू ...जैसे रूम कूलर में अन्दर ही पानी का प्रवाह होता रहता है।...और इन आंसुओं की भरपूर कीमत है सत्ता...कुर्सी ...गद्दी...अधिकार। मैंने मगरमच्छ आज तक नहीं देखा...देखना भी नहीं चाहता। उसके आंसुओं के बारे में सुना है, मगर यह नहीं सुना कि मगरमच्छ ने कभी अपने आंसुओं की कीमत मांगी हो। इन्सानी मगरमच्छ ज्यादा कल्चर्ड होता है। कीमत वसूल लेता है...नकली आंसू बाद में बहाता है...देशहित में।..इमेज बनी रहती है।

... आंसू बहाने के बहानों की कमी नहीं इस देश में। भूख, सूखा, गरीबी, बाढ़, दुर्घटनाएं, धार्मिक दंगे। जहां मौत की खबर आयी, घर वाले बाद में रोते हैं, नेता पहले ही आंसू-भीगा स्टेटमेण्ट जारी कर देता है कि वह बहुत दुखी है। बन गई इमेज। खरी हो गई सुख सुबिधा की करेंसी ।...मौत एक बडी नुमाइश हो गई इस मुल्क में। आंसुओं से छपे इस नुमाइश के टिकट बेचकर कितनी ही रकम उगाह चुके हैं लोग। मार्गरेट के रोने पर पचास डालर मिले और सिलसिला खत्म हो गया।...यह भी कोई बात हुई ? हमारे यहां साढ़े तीन दशकों से एक-एक आंसू कैश हो रहा है। जब-जब किसी ट्रेजेडी पर मुल्क का कोई रहनुमा रोया है, मुझे हंसी आयी है। रोता हुआ नेता या मंत्री मुझे अच्छा नहीं लगता। रोना ही था तो मंत्री काहे को हुआ ? मतदाता की आंखों में आंसू नेचुरल लगते हैं।

...मगर नेता रोये बगैर मानता भी तो नहीं। अपनी इमेज की कीमत बसूलनी है। अन्दर नकली आंसुओं का भण्डार भरा रहता है। इधर कहीं कोई आफत आई उधर आंसूओं का बटन दबा दिया। सारा देश तरल हो उठा। मरने वाले भी अपने मरने का गम भूल गए। नेता रो रहा है ? मरना सार्थक हो गया।...जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आते जाते हैं, आंसुओं की टंकी फुल होती चली जाती है। देशप्रेम बढ़ता चला जाता है।.... मार्गरेट की आत्मा खुश हो रही होगी कि उसके अन्तिम संस्कार पर अगलों को पचास-पचास डालर मिल गए। काश, दिवंगत महिला ने भारतीय अन्तिम संस्कार देखे होते! किसी 'पावरफुल आदमी' के कुत्ते का भी अन्तिम संस्कार होता है तो श्रद्धालु पहुंच जाते हैं...आंसू बहाते हैं और कालान्तर में किसी न किसी रूप में अपने बहाये गए आंसुओं का पूरा फायदा टीप लेते हैं। एक भी आंसू फ्री नहीं बहने पाता।...हां, कुछ थर्ड क्लास आंसू ऐसे जरूर होते जिनकी कोई कीमत नहीं होती...मसलन, बेरोजगार नौजवान के आंसू...क्वारी बेटी के बाप के आंसू, लुटी हुई इज्जत के आंसू...धर्म के नाम पर चली हुई गोली के फलस्वरूप टूटी हुई चूड़ियों के आंसू ... किसी बच्चे के भूखे पेट के आंसू...अस्पताल और पुलिस की यातना झेलने वाले के आंसू...वगैरह। मैं इन्हें आंसू ही नहीं मानता। यह तो 'सारे जहां से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा' का नित्य क्रम है। इनकी कोई कीमत नहीं लगती। लगनी भी नहीं चाहिए।


... हर आंसू मोती नही होता। जिनके आंसू 'मोती' होते हैं वे उनकी पाई-पाई वसूलना भी खूब जानते हैं। हमदर्दी कोई सड़क पर पड़ा सिक्का नही है कि किसी के हाथ भी लग जाए। जिनकी हमदर्दी का महत्व है वे उसे रिजर्व रखते हैं और सही मौके पर कैश करा लेते हैं...मार्गरेट के रोने वालों की तरह।... आंसूओं का फिक्स्ड डिपाजिट...अभिनय का कौशल और नन्ही सी लिप-सिम्पैथी, कुर्सी और इनको बरकरार रखती है और नकली आंसू धीरे-धीरे विदेशी बैंकों में डालर की शक्ल में बदल जाता है। हैसियत के अनुसार सबका विदेशी बैंकों में इन्हीं घड़ियाली आंसूओं का डिपाजिट है। राजनीति में वे शहीदी आंसू अब रहे ही नहीं जो सीने की तहों से निकलकर आंखों तक आते थे। उन्होंने आजादी दिलाई और आंखों ही आंखों में खुश्क हो गए।


-के पी सक्सेना

अगला लेख: आज का शब्द (१३)



अमित
07 मई 2015

क्या क्रिएटिविटी है ...उत्तरोत्तर ...

शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
13 मई 2015
वैविध्य : १- विविधता, २- अनेकता, ३- विभिन्नता, ४- अनेकत्व, ५- वैभिन्य प्रयोग : भारतीय संस्कृति में कितना वैविध्य है फिर भी अप्रतिम एकता I
13 मई 2015
16 मई 2015
प्रमुदित : १- प्रसन्न २- आह्लादित ३- प्रफुल्ल ४- प्रहर्षित ५- पुलकित प्रयोग : सागर निज छाती पर जिनके, अगणित अर्णव-पोत उठाकर I पंहुचाया करता था प्रमुदित, भूमण्डल के सकल तटों पर I I -पं0 रामनरेश त्रिपाठी
16 मई 2015
22 अप्रैल 2015
निर्निमेष : 1- अनिमेष 2- निमेशरहित 3- टकटकी 4- बिना पलक झपकाए या टकटकी बाँधे हुए प्रयोग : वह वृद्ध स्त्री अपनी ही उधेड़-बुन में गुम, शून्य में निहारती रही बड़ी देर तक...अपलक I
22 अप्रैल 2015
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x