“पिरामिड”

01 अगस्त 2018   |  महातम मिश्रा   (62 बार पढ़ा जा चुका है)

“पिरामिड”


रे

हवा

बदरी

आसमान

साँझ विहान

पावस रुझान

घटता तापमान॥-१


री

बाढ़

निगोरी

भीगी ओरी

रूप अघोरी

पागल बदरी

गिरा गई बखरी॥-२


महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी

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