मैं चोर हूँ काम है चोरी दुनियां में हूँ बदनाम ( भाग-२)

01 अगस्त 2018   |  pradeep   (113 बार पढ़ा जा चुका है)

ना तो धर्म तुमसे है, ना ही देश और जात तुमसे हैं. सिर्फ किसी देश में या किसी धर्म या जात में जन्म लेने में तुम्हारा अपना क्या योगदान है? तुम्हारी क्या महानता है? मेरे देश में महान लोगों ने जन्म लिया कहने भर से तुम महान नहीं हो जाते. स्वयं श्री कृष्ण भगवान् ने कहा है कि मैं सब में हूँ और सब मुझ में है. तो तुम अकेले ही नहीं सब महान है क्योकि भगवान् तो उन सब में भी है. फर्क सिर्फ सोच में है. सत्य किसी एक की सोच पर निर्भर नहीं हैं. सत्य अटल है , सनातन है. <br>

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