“मुक्तक”तर्क तौलते हैं सभी लिए तराजू हाथ।

03 अगस्त 2018   |  महातम मिश्रा   (59 बार पढ़ा जा चुका है)

“मुक्तक”


तर्क तौलते हैं सभी लिए तराजू हाथ।

उचित नीति कहती सदा मिलों गले प्रिय साथ।

माँ शारद कहती नहीं रख जिह्वा पर झूठ- ज्ञान-

ध्यान गुरुदेव चित अर्चन दीनानाथ॥-१


प्रथम न्याय सम्मान घर दूजा सकल समाज।

तीजा अपने आप का चौथा हर्षित आज।

धन-निर्धन सूरज धरा हो सबका बहुमान-

गाय भाय बेटी-बहन माँ- ममता अधिराज॥-२


महातम मिश्र गौतम गोरखपुरी

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