वर्तमान और गीता

04 अगस्त 2018   |  pradeep   (93 बार पढ़ा जा चुका है)

भूत जिसे आकाश निगल गया है और भविष्य के बीज अभी आकाश में है, ना तो भूत साथ है और ना ही भविष्य, साथ है तो सिर्फ वर्तमान. भूत और भविष्य पर गर्व वो करते है जिनके पास वर्तमान में गर्व करने को कुछ होता नहीं है. हम क्या थे या हम क्या होंगे इससे किसी को कोई मतलब नहीं, दुनियां सिर्फ वर्तमान में क्या है उसी से परखती है. कृष्ण ने अर्जुन से गीता में यह ही कहा है कि ना तो पीछे मुड़कर देखने की आवश्यकता है ना ही भविष्य के बारे में सोचने की, वर्तमान में तेरे सामने युद्ध है और तुझे सिर्फ युद्ध की सोचनी चाहिए. भूत जो तेरे हाथ से निकल चूका है, जिसे बदला नहीं जा सकता, भविष्य तेरे हाथ में नहीं है, कब महा प्रलय हो जाए ये तू नहीं जानता. तेरे हाथ में सिर्फ वर्तमान है, इसलिए वर्तमान की सोच, यही वर्तमान तेरे आने वाले भविष्य का कारण बनेगा.(आलिम)

अगला लेख: बब्बू (भाग-१)



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
10 अगस्त 2018
बब्बू की याद आज इस दौर में इसलिए आ गई कि आज किसी ऐतिहासिक चरित्र के बारे कुछ कह दो , लिख दो या फिल्म ही बना लो तो एक हंगामा हो जाता है. ना तो हम उस दौर में थे और ना ही हमने देखा है , कुछ उस वक्त के इतिहासकारों ने या कवियो
10 अगस्त 2018
23 जुलाई 2018
अभी तक तो हमारे देश में नेता हिंदू-मुस्लिम की बात कर और भावनाएं भड़काकर वोट लेने का काम करते थे. लेकिन अब एक पुलिसवाले को भी कहना पड़ गया है कि क्या इस देश में मुस्लिम होना गुनाह है. पुलिसवाले का ये वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है. लेकिन इसके पीछे एक हत्याकांड ह
23 जुलाई 2018
08 अगस्त 2018
सनातन धर्म में कर्म और धर्म दोनों की ही व्याख्या की गई है , पर तथाकथित हिन्दू इन दोनों ही शब्दों का अर्थ अपनी सुविधा के अनुकूल प्रयोग करते रहे है. सनातन धर्म की सुंदरता इसमें है कि उसमे सभी विचार समा जाते है. यही कारण है कि लोग
08 अगस्त 2018
22 जुलाई 2018
*इस समस्त सृष्टि में श्रीराम नाम की व्यापकता कण कण में समायी हुई है | राम कौन हैं ??? कोई अयोध्या के राजकुमार श्री राम को भजता है तो कोई निर्गुण निराकार राम को | अयोध्या में श्री राम का अवतरण त्रेतायुग में हुआ था परंतु राम नाम की व्यापकता वेदों में भी दिखाई पड़ती जो कि सृष्टि के आदिकाल से ही हैं |
22 जुलाई 2018
01 अगस्त 2018
मै
ना तो धर्म तुमसे है, ना ही देश और जात तुमसे हैं. सिर्फ किसी देश में या किसी धर्म या जात में जन्म लेने में तुम्हारा अपना क्या योगदान है? तुम्हारी क्या महानता है? मेरे देश में महान लोगों ने जन्म लिया कहने भर से तुम महान नहीं हो जाते. स्वयं श्री कृष्ण
01 अगस्त 2018
01 अगस्त 2018
मै
ना तो धर्म तुमसे है, ना ही देश और जात तुमसे हैं. सिर्फ किसी देश में या किसी धर्म या जात में जन्म लेने में तुम्हारा अपना क्या योगदान है? तुम्हारी क्या महानता है? मेरे देश में महान लोगों ने जन्म लिया कहने भर से तुम महान नहीं हो जाते. स्वयं श्री कृष्ण
01 अगस्त 2018
08 अगस्त 2018
सच बोलने से गर डर लगता है यारो, झूठ ऐसा बोलो कि सच सामने आये. सच को बताने की अक्सर ज़रूरत तो नहीं होती, हाकिम ही गर हो झूठा,तो सच बताना ही पडेगा. (आलिम).
08 अगस्त 2018
24 जुलाई 2018
*सनातन धर्म में प्रभु प्राप्ति के कई साधन बताये गये हैं ! जैसे कि :- जप , तप , पूजा , पाठ , सतसंग आदि | कभी कभी मनुष्य दिग्भ्रमित हो जाता है कि वह प्रभु को प्राप्त करने के लिए कौन सा मार्ग चुने | प्राचीनकाल की कथाओं को पढकर ऐसा लगता है कि सबसे महत्तपूर्ण साधन जप एवं तप ही रहे होंगे | परंतु किसी भी ज
24 जुलाई 2018
11 अगस्त 2018
दि
दिगपाल, मेरे बचपन का साथी था, दोस्त था या यूँ कहे कि वो मेरा मुण्डू(बेबी सिटर) था. दरअसल दिगपाल हमारी मौसी का नौकर था, उसकी उम्र कितनी थी मैं नहीं जानता पर शायद 12 या 14 साल का रहा होगा. पहाड़ी था या नेपाली ये भी मुझे नहीं पता
11 अगस्त 2018
09 अगस्त 2018
दि
ना खुल जाए राज, हमको हमसफ़र बनाया है, छिपाने बेवफाई अपनी यूँ हमसे दिल लगाया है. खूबसूरत है जो वो क्योंकर न बेवफा न होंगे, हो दुनियां दीवानी जिनकी वो ही तो बेवफा होंगे.होते हम भी खूबसूरत तो शायद बेवफा होते, बदसूरती ने ही हमको वफ़ा
09 अगस्त 2018
12 अगस्त 2018
कलम के सिपाही की विरासत को यूँ बदनाम ना करो, सिपाही हो कलम के तुम यूँ किसी के प्यादे ना बनो.ये दो लाइने कलम के सिपाही मुंशी प्रेमचंद को समर्पित है, और उन पत्रकारों , लेखकों, कवियों और शायरों को उनका धर
12 अगस्त 2018
05 अगस्त 2018
बब्बू एक नाम है जो कभी कभी मेरे ज़हन में उभरता है. बब्बू मेरी सबसे बड़ी मौसी का लड़का था जिसकी दिमागी हालत ठीक नहीं थी, कभी कभी दौरे पड़ते थे तो उसे शायद बाँध दिया जाता था , वैसे ज्यादातर वो खुला रहता था, मुझे बचपन का सिर्फ इतना याद है जब वो कुछ ठीक
05 अगस्त 2018
22 जुलाई 2018
*सनातन धर्म की उन्नति में सतसंग कथाओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा है | जहाँ एक ओर सतसंग करके हमारे पूर्वजों ने नित्य नये ज्ञान अर्जित करते रहे हैं वहीं सदैव से कुछ लोग सतसंग कथाओं में विघ्न भी डालते आये हैं | यह आवश्यक नहीं है कि वे ऐसा जानबूझकर करते हों परंतु कुछ ऐसा अवश्य कर जाते हैं जिससे सतसंग भंग
22 जुलाई 2018
08 अगस्त 2018
सनातन धर्म में कर्म और धर्म दोनों की ही व्याख्या की गई है , पर तथाकथित हिन्दू इन दोनों ही शब्दों का अर्थ अपनी सुविधा के अनुकूल प्रयोग करते रहे है. सनातन धर्म की सुंदरता इसमें है कि उसमे सभी विचार समा जाते है. यही कारण है कि लोग
08 अगस्त 2018
03 अगस्त 2018
जा
फक्र उनको है बता जात अपनी, शर्मिंदा हम है देख औकात उनकी.किया कीजियेगा अपनी इस जात का, मिलेगा तुम्हे भी कफ़न जो मिलेगा बे-जात को. (आलिम)
03 अगस्त 2018
09 अगस्त 2018
दि
कहते है कि जब दिल और दिमाग के बीच किसी मुद्दे को लेकर जंग चल रही हो तो दिल की बात सुननी चाहिए ना कि दिमाग की. ऐसी ही सोच लोगो को भक्ति की तरफ ले जाती है जहाँ लोग दिमाग से काम लेना बंद कर देते है. भक्ति योग और कर्म योग दोनों ही रास्ते मुक्ति की
09 अगस्त 2018
06 अगस्त 2018
पू
पूजा, उपासना जो बिना स्वार्थ के किया जाए, बिना किसी फल की इच्छा से किया जाए, जो सच्चे मन से सिर्फ ईश्वर के लिए किया जाए वो पूजा सात्विक है , सात्विक लोग करते है. जो पूजा किसी फल की प्राप्ति के लिए की जाये, अपने शरीर को कष्ट द
06 अगस्त 2018
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x