पूजा का सच्चा अर्थ

06 अगस्त 2018   |  pradeep   (126 बार पढ़ा जा चुका है)

पूजा, उपासना जो बिना स्वार्थ के किया जाए, बिना किसी फल की इच्छा से किया जाए, जो सच्चे मन से सिर्फ ईश्वर के लिए किया जाए वो पूजा सात्विक है , सात्विक लोग करते है. जो पूजा किसी फल की प्राप्ति के लिए की जाये, अपने शरीर को कष्ट देकर की जाए वो पूजा राजसी है, और जो पूजा किसी के बुरे के लिए की जाए वो पूजा तामसी है . आप कौनसी पूजा करते है ? नफ़रत फैलाने वाले, धर्म के नाम पर दंगा, हत्या करने वाले तामसी लोग है, जिनमे राक्षसी गुण होते है. जो संसार के विनाश के लिए पैदा हुए है. ये गीता का ज्ञान है. गीता भेट करने से गीता का ज्ञान प्राप्त नहीं होता ना ही गीता पढ़ने मात्र से. गीता को समझने से ही ज्ञान की प्राप्ति होती है. हिन्दू हिन्दू चिलाने से हिन्दू नहीं बन जाते, हिन्दू धर्म (सनातन धर्म) के आदर्शो पर चलने से ही हिन्दू होता है. शैतानी ताकते गीता से युद्ध की प्रेणना लेती है दैविक तकते शांति की प्राप्ति की. (आलिम)

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